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न कानून का डर न समाज का भय, उधार के पैसों के लिए दोस्तो ने ही युवक का अपहरण कर पीट डाला और मृत समझ उसे फेक भाग गए, अस्पताल में हुई मौत 6 आरोपी पहुँच गए सलाखों के अंदर

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0 सूद पर नशे और सट्टा जुआ के लिए पैसा दे दबंगाई करने वाले रसूखदारों पर नही अंकुश
0 आये दिन युवा कर रहे आत्महत्या

बिलासपुर।* लगता है युवाओ में पुलिस और समाज का भय ही। ही रह गया। तभी तो लेनदेन के विवाद में युवकों ने अपने दोस्त का अपहरण कर बंधक बना उसे अधमरा होते तक पीटा और मृत समझ घायल को सड़क पर फेंक भाग निकले। पुलिस आधा दर्जन आरोपियो को तकनिकी साक्ष्य और मुखबिर की सूचना पर गिरफ्तार करने का दावा कर रही है।ये इस तरह की कोई पहली घटना नही बल्कि पहले भी हो चुकी है। आरोपियो के दबंग और रसूख के आगे मामला दब जा रहा।


पुलिस के मुताबिक आरोपी और मृतक दोस्त थे उनके बीच लेनदेन का विवाद था। गत 24 अक्टूबर को आरोपी तोरवा निवासी हरिओम सिंह को अपहृत कर ले गए थे। आरोपियों ने उसे अधमरा होते तक बंधक बना डंडे से पीटा और उसे मृत समझ विनोबानगर में गली नम्बर एल-5 के पास फेंककर भाग गए। इसके बाद सिम्स में उसकी मौत हो गई। तारबाहर पुलिस ने अपराध क्रमांक 333/2024 धारा-103(1), 238, 3(5) बीएनएस के तहत अपराध पंजीबद्ध कर मृतक हरिओम के परिवारजनो एवं अन्य गवाहो से पूछताछ के दौरान यह बात सामने आई कि इन्द्रजीत और सुयश नाम के व्यक्ति से उसका लेनदेन के संबंध में विवाद था। 24 अक्टूबर को आरोपी उसे ढूंढते उसके घर तक गए फिर उसे मोबाइल पर कॉल भी किया था। मुखबीर सूचना व तकनीकी साक्ष्य के आधार पर संदेही सुयश सिंह को पकडकर पुलिस ने पूछताछ की तो उसने अपने 5 अन्य साथियों के साथ वारदात करना कबूल लिया।

मृतक की जिंदा और मौत के बाद कि तस्वीर

ये आरोपी पहुँचे सलाखों के अंदर

इसके बाद पुलिस ने आरोपी तिफरा यदुनन्दन नगर निवासी 31 वर्षीय सुयश सिंह राजपूत पिता लाला सिंह, कोरबा रामपुर पथर्रीपारा हालमुक़ाम अटल आवास कोनी निरतू निवासी 22 वर्षीय सक्षम पिता दिनेश पाण्डेय, मोपका चौक पुराना तालाब निवासी 27 वर्षीय संतोष पिता दुष्यंत सोनी सीपतरोड सरकंडा सीपतरोड राधिका के 30 वर्षीय तुषार पिता कल्याण मजूमदार,
लिंक रोड अग्रसेन चोक के 24 वर्षीय दामन सिंह पिता लखन सिंह उइके, राजकिशोर नगर चंदन आवास निवासी 29 वर्षीय हर्षित पिता महेश्वर गौरहा को गिरफ्तार कर उनसे वारदात में इस्तेमाल की गई बाइक और डंडे को जप्त कर लिया।

कब तक चलेगा नँगा नाच


पर सवाल यह उठ रहा कि ऐसे ब्याजखोरो पर आख़िर पुलिस कब तक लगाम लगाएगी जो नाबालिग और युवाओं को अपने फार्म हाउस में ले जाकर नशे की लत लगा उन्हें उधार देकर जुआ खिलवाते है फिर जुए पर दिए उधार की रकम की वसूली के लिए कभी उनकी गाड़ियां तो कभी जेब की तलाशी लेकर पैसा छीन घर वालो पर रकम के लिए दबाव बनाते है जिससे डिप्रेशन में आकर आये दिन आत्महत्या कर रहे। क्या ऐसे सूदखोरों को रोकने पुलिस के पास मोई कानून नही है। या फिर ऐसे लोगो पर अंकुश लगाने कोई पहल होगी भी।

और विवेचना में हो धार

छत्तीसगढ़ और खासकर बिलासपुर को शांति का टापू कहा जाता है पर इस तरह की अवैध गतिविधियों के कारण माहौल बिगड़ा हुआ है ऊपर से विवेचना में त्रुटि के कारण गम्भीर अपराध के आरोपियों का साक्ष्य के अभाव में कानून के शिकंजे से बच निकलने की चाल इस तरह के अपराधों में बढ़ोतरी हो रही जो समाज के लिए खतरा और पुलिस के लिए बड़ी चुनौती भी जो लगातार विवेचना के स्तर को सुधारने के लिए दी जा रही ट्रेनिंग के बाद भी नही सुधर रही वजह चाहे जो भी हो।


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