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नवरात्र की सप्तमी पर सारा शहर माँ जगत जननी के दर्शन के लिए पंडालों में, जूना बिलासपर और कोनी में फंसी रही एम्बुलेंस सड़को पर जगह- जगह लगा रहा जाम, ट्रैफिक व्यवस्था को 173 करोड़ के मशीनी दावे के बाद मैनुअल दावा भी धड़ाम…?

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बिलासपुर। नवरात्र पर्व की सप्तमी की रात शनिवार को माँ जगतजननी के पंडालों के दर्शन करने सारा शहर ज़्डक पर क्या निकलां त्योहार के दौरान ट्रैफिक व्यवस्था बनाने के दावे के बाजा फट गया। शहर का कोई सडक कोई चौराहा जा से अछूता नही रहा। लोग घण्टो जाम में फंसे रहे। जूना बिलासपुर – छतरी चौक और रतनपुर रोड में कोनी- सेंदरी के बीच मरीज और परिजनों से भरी एम्बुलेंस तक आधे से पौन घण्टे जाम में फंसी रही।
173 करोड़ के आइटीएमएस के मशीनी दावे के बाद अब प्रशासन के मैनुअल दावा भी फेल ही रहा।

शहर में त्योहार की रौनक के बीच यातायात व्यवस्था की ऐसी तस्वीर सामने आई इन तस्वीरों ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए।


कोनी में हुए एक्सीडेंट के मरीज कमल भार्गव को अस्पताल पहुंचाने के दौरान 108 एंबुलेंस भीड़ और वाहनों के बीच घंटों फंसी नजर आई।
इन तस्वीरों ने शहर को अनकंट्रोल व्यवस्था और ट्रैफिक व्यवस्था को व्यवस्थित करने के तमाम दावों को उजागर कर दिया।
अब सवाल ये है कि क्या बिलासपुर के जिला और पुलिस प्रशासन के पास यातायात को व्यवस्थित करने कोई उपाय नही है, और यदि नही है तो शहर की सड़कों पर सिटी बसें दौड़ाने के दावों के क्या होगा।
और उससे भो बड़ा सवाल ये है कि भगवान न करे पर्व के दौरान कही कोई बड़ी अनहोनी हो जाये तो क्या होगा…?
क्योकि जाम में फंसी एंबुलेंस का हर मिनट किसी मरीज के लिए बेहद कीमती हो सकता है।

जूना बिलासपुर में ऐसे जाम में फंसी रही एम्बुलेंस
कोनी में जाम में फंसी रही एम्बुलेंस

जरूरत इस बात की है कि


173 करोड़ के आईटीएमएस और ग्रीन कॉरिडोर जैसे लोकलुभावन सनकटकारी योजनाओं के बजाए शहर के विस्तार, बढ़ती आबादी और शहर में प्रतिदिन प्रदेश, सम्भाग, जिले और विदेशों से आनेवाले नागरिकों की संख्या और जरूरत के हिसाब से व्यवस्थित प्लानिंग कर नई सड़कों और पुल- पुलियो की व्यवस्था कर आवागन की व्यवस्था को दूरगामी सोच के साथ प्लान किया जाए।

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