
बिलासपुर/बिलासा कला मंच के संयोजक और अरपा बचाओं अभियान के संस्थापक डॉ सोमनाथ यादव ने हिन्दू जनभावना को ध्यान में रखते हुए जीवनदायनी अरपा मैय्या की दुर्दशा पर चिंता जाहिर करते हुए मां दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन से पहले नदी के प्रदूषित और आचमन के अयोग्य जल का हवाला दे जिला और नगर निगम प्रशासन से पारंपरिक विसर्जन स्थल जूना बिलासपुर पचरी घाट और तोरवा छठघाट पर तत्काल विशेष सफाई कराने और अरपा भैंसाझार डैम से शुद्ध पानी छोड़ने की मांग की है।

डॉ यादव ने कहा कि शहर के बीचोबीच बहने वाली अंतः सलिला अरपा मैय्या के प्रति शहरवासियों में अपार श्रद्धा है। पर करोड़ो की बड़ी बड़ी योजनाओं के दावों के बीच अरपा देखते देखते और बदहाल और मैले गड्ढे में तब्दील होते गई। शहर के गंदे अनट्रीटेड सीवेज के पानी और कचरे के लगातार सीधे नदी में गिरने से नदी का जल अत्यधिक प्रदूषित हो गया है। उन्होंने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में चल रहे जनहित याचिकाओं और प्रशासनिक रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि शहर के अलग अलग इलाको से 70 छोटे-बड़े नालों का लगभग 40% गंदा पानी बिना किसी ट्रीटमेंट के सीधे अरपा नदी में बहाया जा रहा है। नदी तट पर कचरे और सदी गली सब्जियां फेंकी जा रही।

और ये है पारंपरिक विर्सजन घाट पचरी घाट…
जूना बिलासपुर स्थित ऐतिहासिक पचरी घाट और तोरवा घाट पर विसर्जन के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। वर्तमान में इन घाटों पर गंदगी और गाद जमा होने के कारण पूजा-अर्चना और विसर्जन की धार्मिक व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। श्रद्धालुओ को गन्दगी और बदबू के बीच शासन- प्रशासन को कोसते हुए प्रतिमाओं का विसर्जन करना पड़ता है।
विसर्जन के लिए पानी छोड़ने मांग
अरपा बचाओं अभियान के संयोजक और बिलासा कला मंच बिलासपुर के संस्थापक डॉ सोमनाथ यादव का कहना है कि प्रतिमा विसर्जन से पहले यदि अरपा भैंसाझार परियोजना से पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं छोड़ा गया, तो ठहरे हुए गंदे पानी में विसर्जन करने से नदी की स्थिति और विकराल हो जाएगी। साफ पानी के प्रवाह से नदी का प्रदूषण कम होगा और विसर्जन गरिमापूर्ण तरीके से संपन्न हो सकेगा।
ये है मांग
- पचरी घाट और तोरवा घाट की युद्धस्तर पर मशीनों द्वारा सफाई कराई जाए और वहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हों।
- विसर्जन के दिन अरपा में शुद्ध जल का निरंतर प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए भैंसाझार डैम के गेट खोलकर पानी छोड़ा जाए।
- विसर्जन के बाद मूर्तियों के अवशेषों और ढांचों को नदी से तुरंत निकालने के लिए अतिरिक्त सफाई कर्मियों की तैनाती की जाए।
