
0 बोली अफसरो और ठेकेदारों को तलब कर देंगी चेतावनी
0जब अनुबंध में है उल्लेख तो करना होगा हर माह पेमेंट, नही तो छोड़ दे काम
बिलासपुर/ नगर निगम के अफसर और ठेकेदार न सिर्फ गरीबो का हक मार उन्हें तिल- तिल मरने मजबूर कर रहे, बल्कि 3-3, 4-4 माह का पारिश्रमिक रोक आये त्यौहार के दिन ही 2-2 हजार का एडवांस दे असंतोष पैदा कर रहे है। ये हाल तब है जब शासन का स्पष्ट निर्देश है कि दैनिक को 5 और टॉस्क, ठेका स्टाफ को हर हाल में हर माह के 7 तारीख तक वेतन/ पारिश्रमिक का भुगतान किया जाय। हाल ही में मेयर ने एक ठेका श्रमिक की शिकायत पर ठेकेदार को फटकार लगा चुकी है। उनका कहना है कि ये बेहद निंदनीय है वे अफसरो और ठेकेदारों को तलब कर चेतावनी देंगी। नगर निगम में या तो जनप्रतिनिधियों के भाई भतीजे ठेकेदारी कर रहे, या फिर उन्होंने दूसरे को आगे कर खुद ठेका ले रखा है। नेताओ के रिस्तेदारो का अफसर भी कुछ नही बिगाड़ सकते, सबको पता है कि निगम के ठेकेदारी कखेल कैसे चल रहा, जो ठेकेदार 60 श्रमिक मुहैया कराने टेंडर लिए है उनके पास 6 श्रमिक नही है। कई आईएएस अफसर आये और चले गए किसी ने इस चक्रव्यूह से उलझने कोशिश नही की। एक उपायुक्त ने लगभग 90-92 करोड़ का ठेका श्रमिको का एडवांस घोटाले को उजागर कर वसूली के लिए डंडा किया तो ठेकेदारों ने मिलकर उनका यहाँ से तबादला करा अपनी ताकत दिखा दी।
उनके इस प्रयास से श्रमिको को एक लाभ तो हुआ कि अब उन्हें पूरा पारिश्रमिक मिलने लगा नही तो आधा मिलता था वो भी 3-4 मलह में जो आज भी बदस्तूर वैसा ही चल रहा।
ठेका कर्मियों को कही 3 तो कही 4 तो कही 6-6 मलह से पारिश्रमिक नही मिल रहा। विजयादशमी पर्व के पहले जब ठेका श्रमिको ने पारिश्रमिक की मांग उठाई तो मंगलवार विजयादशमी के दिन श्रमिको को 3 – 4 मलह से रोके गए वेतन की जगह 2-2 हजार रुपये एडवांस थमा दिया गया, कुछ श्रमिको ने तो भागते भूत की… सही टाइप जो मिला ले लिया लेखों ज्यादातर आक्रोशित श्रमिको ने 2000 रुपये एडवांस लेने से मना कर दिया। सवाल यह उठ रहा कि क्या ये ठेकेदार मेयर और शासन से भी ऊपर हो गए जो उनके निर्देश उनकी चेतावनी को खुलेआम ठेंगा दिखा रहे है।
नेताओ को खुश करने पैसा कामगारों को एडवांस का ठेंगा
सवाल यह उठ रहा कि जब निगम प्रशासन के पास ठेका श्रमिको को पारिश्रमिक भुगतान करने पैसा नही, जब करोड़ो के बिजलीं बिल पटाने और नागरिकों को मूलभूत सुविधा मुहैया कराने पैसा नही है तो दो-दो रावण दहन महोत्सव पर लाखों रुपये क्यो फूंका जा रहा।क्या प्रशासन का काम अब नेताओ को खुश करना रह गया है।
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बेहद निंदनीय है गरीब जरूरतमंद श्रमिको का 3-3, 4-4 माह का पारिश्रमिक रोकना बहुत गलत है, पर न तो अफसर को मतलब है न ठेकेदार को कि 8-10 हजार पाने वाले ठेका श्रमिको का घर कैसे चलता होगा उनके भी परिवार है बच्चे है साल भर का त्योहार है। ठेके के अनुबंध में भी इस बात का उल्लेख है कि उन्हें हर श्रमिको को भुगतान देना है। क्यो ऐसे हो रहा अफसरो से बात करती हूँ, अफसरो और ठेकेदारों की बैठक ले उन्हें चेतावनी दी जाएगी कि श्रमिको को हर माह भुगतान कीजिये और नही कर सकते तो बन्द कीजिये ऐसा नही चलेगा आखिर उनका भी परिवार है काम जब ठेकेदार की बी हाफ में निगम का कर रहे तो मजदूरी मांगने कहा जाए…
पूजा विधानी, मेयर नगर निगम बिलासपुर
