
0पूर्व आदेश की अवहेलना पर जवाब तलब, पूछा—क्यों न शुरू की जाए अवमानना की कार्रवाई?
0मामला बिलासपुर के चांटीडीह किसान मोहल्ला के देव कुमार की याचिका का
बिलासपुर। शहरी निर्धन आवास योजना के तहत छह साल पहले आवंटित मकान का कब्जा नहीं मिलने के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू की एकलपीठ ने बिलासपुर कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि हाईकोर्ट के पूर्व आदेश का पालन नहीं करने पर उनके खिलाफ न्यायालय की अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।
आवंटन के छह साल बाद भी नहीं मिला कब्जा
मामला बिलासपुर के चांटीडीह किसान मोहल्ला निवासी देव कुमार निर्मलकर से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने अधिवक्ता अब्दुल वहाब खान के माध्यम से अवमानना याचिका दायर की है। याचिका के मुताबिक, देव कुमार को 15 अक्टूबर 2020 को लिंगियाडीह, वार्ड क्रमांक 52 में मकान नंबर एन-1 आवंटित किया गया था, लेकिन आवंटन के बावजूद उसे मकान का कब्जा नहीं मिला।
लंबे समय तक प्रयास करने के बाद याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट की शरण ली। इस पर 15 जून 2026 को हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को मकान की मरम्मत कराकर उसे रहने योग्य स्थिति में याचिकाकर्ता को कब्जा सौंपने का निर्देश दिया था।
आदेश के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप
याचिकाकर्ता के अनुसार, हाईकोर्ट के आदेश का पालन कराने के लिए उसने 13 जुलाई 2026 को नगर निगम आयुक्त और 14 जुलाई 2026 को कलेक्टर के समक्ष आदेश की प्रति के साथ आवेदन प्रस्तुत किया। इसके बावजूद मकान का कब्जा नहीं मिलने पर उसने अवमानना याचिका दायर की।
मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 7 अक्टूबर 2026 को दोनों अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। अब अधिकारियों को जवाब देना होगा कि पूर्व न्यायिक आदेश के पालन में कथित चूक के लिए उनके विरुद्ध अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए। मामले में अगली सुनवाई पर अधिकारियों के जवाब और न्यायालय के रुख पर नजर रहेगी।
