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मंगलसुत्र-9, चर्चित किम्स के खिलाफ ऐसे हुई जांच, कोई कुछ नही बता पा रहे साहब

0 पेल-धपेल के लगे 3 माह, अब रिपोर्ट के लिए लगानी होगी आरटीआई

0 आवेदक से कह रहे पूरा जांच प्रतिवेदन चाहिए तो लगाए आरटीआई

बिलासपुर। छत्तीसगढी में एक कहावत है कि महि मांगे जाए ठेकवा लुकाए। जिले के लुंजपुंज स्वास्थ्य महकमे का कुछ ऐसा ही हाल है। विभागीय अफसर चर्चित किम्स के मंगलसूत्र कांड की जांच पूरी होने सप्ताह भर से हल्ला मचा रहे। आवेदक को भी बुला लिया गया और पिछले 4 दिन से उसे कागज देने चक्कर कटवा रहे। इतना ही नही आवेदक से कहा जा रहा कि 1 पन्ने का रिपोर्ट आपको दिया जाएगा। पूरा जांच प्रतिवेदन चाहिए तो आरटीआई के तहत आवेदन लगाए। अब सवाल यह उठ रहा कि फिर जांच क्या ईंट का चूल्हा बनाकर रिपोर्ट के कागज से चाय बनाने के लिये कराया गया है।


ये है मामला-


गोड़पारा निवासी निगम के टॉस्क कर्मी कैलाश सोनी ने किम्स प्रबंधन से ईएसआईसी चलेगा यह कन्फर्म करने के बाद अपनी पत्नी रेणु को डिलीवरी के लिए हॉस्पिटल में भर्ती कराया। गत 4 सितम्बर को ऑपरेशन से बेटे का जन्म हुआ। 2 दिन बाद गत 6 सितम्बर को प्रसूता को बुखार आने के बावजूद यह कहकर डिस्चार्ज कर ईएसआईसी कार्ड एक्सेप्ट न होने की बात कह पैसा जमा करने दबाव बनाया गया तब कैलाश ने आयुष्मान कार्ड भी प्रस्तुत किया पर उसे नकद जमा करने दुर्व्यवहार कर इतना दबाव बनाया गया कि कैलाश को अपने पत्नी के 3 मंगलसूत्र गिरवी रख अस्पताल में रकम जमा करना पड़ा। कैलाश ने जब कहा कि रेणु तो बुखार से तप रही तब उससे कहा गया कि आगे इलाज कराना है तो काउंटर से फिर पेमेंट कर रसीद कटाकर आइये तब आगे इलाज होगा।

तब शुरू हुई जांच

दुर्व्यव्हार से अपमानित निगम कर्मी ने पहले सीएमएचओ कार्यालय फिर कलेक्टर के समक्ष शिकायत कर जांच और कार्रवाई की मांग की। कलेक्टर के आदेश पर डॉ गायत्री बांधी के नेतृत्व में 3 सदस्यीय जांच टीम का गठन कर मामले की जांच कराई गई।

आटीआई लगाओ खुद जान जाओ

पता नही वो कौन सी ताकत है कि किम्स के खिलाफ लगातार शिकायत मिलने और 5 प्रकरण और प्रकरणों की जांच करने वाले अफसर इसके बाद संट पड़ गए। आलम यह है कि जांच अधिकारी कब रही कि हमने जो पाया जांच कर रिपोर्ट सीएमएचओ को सौप दी। सीएमएचओ डॉ अनिल श्रीवास्तव कह रहे की जांच प्रतिवेदन उन्हें मिला ही नही। स्वास्थ्य अधिकारी डॉ प्रमोद तिवारी कह रहे 1 पन्ने का रिपोर्ट देवांगन बाबू से ले लीजिये। यदि पूरा जांच प्रतिवेदन चाहिए तो आरटीआई के तहत लेना होगा। वह 4 दिन से सीएमएचओ कार्यालय के चक्कर काट रहा।

जब जांच में ये हाल तो रिपोर्ट का मजमून क्या होगा


सीएमएचओ, स्वास्थ्य अधिकारी और जांच अधिकारी से चर्चा के दौरान जो बातें सामने आई वह भी कम चौकाने वाला नही। समझई में नही आ रहा कि चर्चित किम्स प्रबंधन के खिलाफ जांच की जा रही थी या पीड़ित कैलाश के खिलाफ।


विधायक की सख्त तल्खी के बाद ये हाल

स्वाथ्य विभाग के अफसरों को विधायक की नाराजगी का भी खौफ नही है। बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने इसी आयुषमान योजना के चक्कर मे ही अपोलो प्रबंधन को फटकारा है पर अब सरकारी महकमा भी इससे सुधार नही ले रहा। यदि
यही हाल रहा तो मंगलसुत्र और जमीन जायजाद तो दूर इलाज के लिए लोगो को लोटा तट्ठिया तक बेचना पड़ जायेगा।

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शैलेन्द्र पाण्डेय / संपादक / मोबाइल नंबर : 7000256145
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