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प्रायश्चित बन गई परम्परा, चाटीडीह में 68 वे संगीतमय अखंड नवधा रामायण से माहौल हुआ भक्तिमय

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0 शहर में 68 सालों से अनवरत चल रही एकमात्र परम्परा

0 भक्त संगीतमय भजन का आनन्द ले कर रहे जीवन को कृतार्थ

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर चाटीडीह रामायण चौक में बतौर प्रायश्चित्त 68 सालों से चल रहे अखंड नवधा रामायण का गुरुवार को 5 वॉ दिन है।
मछली के जालियों के सजावट और गैस बत्ती से शुरू हुई यह अनवरत परम्परा अब नई पीढ़ी के हाथ है। यहां 24 घण्टे सम्भाग भर से आने वाली मंडलियों के द्वारा संगीतमय भजन की प्रस्तुति दी जा रही है।


समिति के आचार्य पंडित श्यामकांत उपाध्याय ने बताया कि आज से 68 साल पहले सन 1956 में मोहल्ले के एक कृषक ने अपने बाड़ी में घुसे मवेशी को भाले से मारा जिससे नन्दी की मौत हो गई। गौ हत्या के पाप के प्रायश्चित के लिए उस समय स्वर्गीय मदन भैया ने वहीं नन्दीश्वर मंदिर का निर्माण कराया इसी प्रायश्चित के तहत चौक पर अखंड नवधा रामायण का भी आयोजन किया गया। इसके बाद यहाँ लगातार नवधा भक्ति का आयोजन किया जा रहा।

जिससे चौक का नामकरण ही रामायण चौक हो गया तब से अखंड नवधा भक्ति की यह परंपरा हर वर्ष कार्तिक माह में आयोजित की जा रही है।
सम्भाग और दीगर सम्भाग व जिलों से आने वाले रामायण मंडलियों के लिए खान-पान और आवास की व्यवस्था रामायण समिति द्वारा की जा रही है।

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