दिल्ली कांड के बाद भी नही जागे जिम्मेदार, आवेदन को बनाया फुटबॉल…खतरे में पड़ोसी गोड़पारा के जर्जर भवन फंसी भंवर में ये… धंसक गया तो क्या होगा…?

बिलासपुर/ महानगरों में होने वाली बड़ी घटनाओं पर सबक का दिखावा करने वाला प्रशासन हादसों को रोकने कितना संजीदा है, आप खुद देखिये ये तस्वीरे गोलबाजार और- गोड़पारा के बीच पंडित मुन्नूलाल शुक्ला स्कूल के सामने गली की है,,, आप खुद देखिये कैसे एक जर्जर भवन का हिस्सा गली की ओर भरभराकर ढ़हा है और ढहने के कगार पर है, इसी जर्जर भवन पर दूसरा जर्जर भवन टिका है और इसके ठीक सामने 3 रा जर्जर भवन है। तीनो में निगम का नोटिस चस्पा है, पर कार्रवाई के नाम पर दफ्तर- दफ्तर और कागज- कागज का खेल चल रहा। सवाल यह उठ रहा कि यदि ऐसे में कोई अनहोनी हुई तो जिम्मेदार होगा कौन…?



ये हाल तब है जब दक्षिणी दिल्ली के सत्य निकेतन में बहुमंजिला इमारत गिरने से अब तक छह लोगों की मौत होने और कुछ लोगो के मलबे में दबे होने की खबर है। इसके पहले भी मंगला चौक पर और पेंड्रा में एक भवन के भरभराकर ढहने की घटना हो चुकी है।

गली से लगा जर्जर भवन मोहल्ले के साहू परिवार का है, इसके 4 हिस्सेदार है, चारो ने आपसी सहमति से जर्जर भवन को तोड़ने निगम आयुक्त, जोन कमिश्नर, कलेक्टर से लेकर एसडीएम तक को आवेदन दिया,
साहू परिवार के सदस्यों का कहना है कि निगम आयुक्त ने जोन कमिश्नर को मार्क किया है ज़ोन कमिश्नर कह रही अनुमति है आप अपना जर्जर भवन तुड़वा लीजिये, वे इसके लिए तैयार भी है पर जो भी डिस्टिमेन्टल फर्म आता है वह बगल के टिके जर्जर भवन को देख हाथ खड़ा कर दे रहा, आम गली महीने डेढ़ महीने से जर्जर मकान का बड़ा हिस्सा गिरने के कारण बन्द है,
डर ये है कि यदि ये जर्जर भवन भरभराकर ढहता है तो गली और गली के जस्ट बाद वाले मकान और आसपास कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है, यदि ऐसा हुआ तो इसका जिम्मेदार कौन होगा…?
उनको है पता, न उनको है खबर
किसी तरह की अनहोनी के मद्देनजर आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा हर साल बारिश पूर्व सभी निकायों को बकायदा सर्कुलर जारी कर उनके क्षेत्र के जर्जर भवनों का सर्वे कराकर उन्हें ढहवाने निर्देश दिया जाता है, लेकिन जब से जोनल व्यवस्था हुई घ्र मामले में हालात गुड़ गोबर टाइप का है, न निगम आयुक्त को इस बात का पता है म भवन शाखा अधिकारी को कि शहर में ऐसे कितने जर्जर भवनों का सर्वे किया गया है और कितने पर कार्रवाई अपेक्षित है…!




