आयुक्त नगर पालिक निगम ने कहा – FDR नहीं एसडी की रकम लौटाई गई है अनिल बिल्डकॉन को, मामला 8-10 साल पुराने कार्यो के सत्यापन व निरीक्षण की चिड़िया बिठा 1 करोड़ से अधिक के भुगतान और बड़का मांडवाली का…!

0 निकाय चुनाव के घोषणा पत्र में किया गया था, fdr कांड के जांच और कार्रवाई का दावा

0 उठ रहे सवाल कि यदि देनदारी सही थी तो 10 साल तक लटकाया क्यो गया…?
बिलासपुर / नगर निगम कंगाल नही बल्कि जिम्मेदारों ने ये हाल कर रखा है। ताजा मामला मांडवाल की मांडवाली में अनिल बिल्डकॉन को करीब 8-10 साल पुराने एसडी और पीजी के 1 करोड़ 3 लाख के भुगतान का है। निगम आयुक्त का कहना है कि एफडीआर नही एसडी और पीजी की राशि का भुगतान किया गया है। पर सवाल यह उठ रहा कि यदि सब ओके है तो 10 साल से 1 करोड़ से अधिक का भुगतान रोककर क्यो रखा गया, और अब 10 साल बाद ऐसे कौन से पुरातत्व विभाग के अफसर इंजीनियर आ गए जिनके निरीक्षण, परीक्षण और सत्यापन के बाद जून-जुलाई में ही तीजा- पोरा मना दिया गया…!
नगर निगम के लेखा शाखा से मिली जानकारी के मुताबिक अनिल बिल्डकॉन कंपनी को जून- जुलाई 2026 में 27 लाख 63 हजार 531 रुपये और 75 लाख 23 हजार 179 रुपये यानि 1 करोड़ 2 लाख 87 का भुगतान किया गया। जो एफडीआर नही एसडी और पीजी की राशि बताई जा रही।
निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे का कहना है कि एफडीआर की राशि का नही बल्कि एसडी- पीजी की राशि का भुगतान जोन और सबइंजीनियर के रिपोर्ट पर विधिवत किया गया।
8-10 साल पुराना है तो नही कर सकते
सीजीडीएनए ने इस मामले में पीडब्ल्यूडी के एक रिटायर्ड और एक सेवारत कार्यपालन अभियंता से चर्चा कर जानना चाहा कि क्या ये सही है।
उनका कहना है कि 8-10 साल पुराने निर्माण का वर्तमान में निरीक्षण और रिपोर्ट समझ से परे है, सम्बंधित इंजीनियर के ऊपर आएगा कि उन्होंने कैसे ऐसा रिपोर्ट दिया… गलत तो है 8-10 साल पुराने निर्माण का 10 साल बाद भौतिक सत्यापन कैसे किया जा सकता है।
ये है मामला-
2018 के पहले पूर्व मंत्री के कार्यकाल में पैकेज में 6 टेंडर पर काम निकाला गया था। बताया जा रहा कि इसमें से 3 पैकेज का टेंडर अनिल बिल्डकॉन कंपनी को
मिला, बताया जा रहा कि फर्म ने ये काम पेटी में दे दिया। बताया जा रहा कि पेटी ठेकेदार ने जो काम कराया वो बनते ही उधड़ने लगे, इसके बाद पेटी कॉन्ट्रेक्टर से काम लेकर दूसरे ठेकेदारों से काम को कराया गया जो आज तक भुगतान के लिए भटक रहे।
चुनाव घोषणा पत्र में एफडीआर कांड था अहम मुद्दा,,,उड़ गया फुग्गा…?
77 लाख़ के एफडीआर कांड में खदबर्रों मचने पर, तत्कालीन निगम आयुक्त को ठेकेदार पर 18 लाख का जुर्माना ठोकने का बयान देना पड़ा।
इसके बाद पूर्व मंत्री व नगर विधायक ने ऐन निकाय चुनाव के दौरान एक होटल में प्रेसवार्ता आयोजित कर अपनी पार्टी का स्थानीय घोषणा पत्र जारी किया जिसमें उन्होंने भाजपा की नगर सरकार बनने पर 77 लाख रुपये के एफडीआर अफरा-तफरी कांड और निगम व स्मार्ट सिटी के अनिमितताओं की जांच और कार्रवाई का दावा किया,
चुनाव में भाजपा की जीत हुई 1 साल 7 माह पूर्व गत फरवरी 2025 नई मेयर ने शपथ ली पर हुआ कुछ नही। उल्टे उसी गरम तवे पर फिर 1 से अधिक की मांडवाली का।खेला हो गया…?
ये है हालात
हालात ये है कि नगर निगम की एक भी योजना सफल नही है, फिर चाहे वो करोड़ो का सीवरेज प्रोजेक्ट हो, गोकुलधाम योजना हो, ट्रांसपोर्ट नगर योजना हो, या फिर गंदे पानी की शिकायतों से घिरे करोड़ो के फेलवर जलावर्धन योजना के बाद अमृत मिशन का हो सारी जम्बो योजनाओं की देनदारी, के अलावा करीब 300 करोड़ के बिजलीं बिल का बकाया और ठेका कम्पनियों के अदालती कार्रवाई में पैसा जा रहा, अभी हाल ही में ही निगम के एक रिटायर्ड मृत डॉक्टर के सत्व का और pm आवास के लंबित करोड़ो के भुगतान का आदेश हुआ है। वही सार्वजनिक यातायात सोसायटी के ठेका कंपनी समेत कई कंपनियों ने न्यायधानी के नगर निगम पर करोड़ो की देनदारी मुकदमा ठोक रखा है… सो अलग…?
करोड़ो के नाले- नालियां फिर भी डूब रहा शहर…?
बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र में करोड़ो के नाले नालियां बनवाई गई, चाहे सफाई हो या निर्माण अफसरो ने ताउम्र यही सेवा दी यही से रिटायर हुए बावजूद इसके शहर का व्यवस्थित विकास नही हो सका,,,,यही वजह है कि करोड़ो की सफाई के बाद भी शहर गंदा का गंदा है इतना ही नहीँ निकासी के अभाव में बारिश के दौरान शहर के ज्यादातर इलाके डूबे रहे जनजीवन हफ्ते – दस दी तक अस्त- व्यस्त रहा।




