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दूबर ल दू नही ट्रिपल असाढ़, बदहाल सड़कें, सत्तापक्ष की रैली और विपक्ष की दिल्ली रैली के लिए जोर ऊपर से सड़कों पर लंबा जाम सटरडे को पब्लिक फिर रही हलाकान…?

0 मैनपॉवर और 173 करोड़ का सिस्टम दोनो फेल

0 पूछ रहे बिलासपुरियन्स अब कौन सी योजना से दुरस्त होगी ट्रैफिक

बिलासपुर../ शहर में यातायात व्यवस्था बनाने के तमाम दावे शनिवार को फिर सटक गए। रपटा पुल से लेकर साइंस कॉलेज रोड, अपोलो रोड और पचरी घाट एनीकट तक वाहनों की लंबी कतार लगी रही । ट्रैफिक का अमला, थानों की पुलिस, अफसर और नगर निगम की टीम पूरे दिन भाजपा की लोकतंत्र बचाओ अराजकता हटाओ के पलटवार के लिए यातायात व्यवस्था बनाने और गरुवा बछरू पकड़ने लगी रही।

चाँटीडीह रपटा

लंबे जाम में फंसी पब्लिक बदहाल सड़को के बीच
बिलासपुर के जनप्रतिनिधियों और ट्राफिक व्यवस्था को कोसती रही। शहर की बदहाल सड़कों पर रोज लगने वाले जाम का असर लोगो की दिनचर्या और लोगो की मानसिकता पर पड़ रहा, त्योहार और पॉलिटिकल रैली, प्रदर्शनों का झेल भी पब्लिक पर पड़ रहा क्योकि पुलिस को पूरी ताकत रैली के फ्रंट पर चल रहे नेताओ को धक्का मुक्की से बचाने रस्सी और गोल घेरे में घेरकर समापन स्थल नेहरू चौक तक झेलने में लगानी पड़ी।

जूनाबिलासपुर- पचरीघाट बैराज रोड

सवाल एक नही दो है कि क्या ट्रेफिक व्यवस्था बनाने के नाम पर शहर में प्रयोग और रिहर्सल ही होता रहेगा या इसका स्थाई समाधान निकालने कोई जुगत भी भिड़ाई जाएगी,,,

एक तरफ यातायात विभाग लगातार व्यवस्था सुधारने और जाम से राहत दिलाने के दावे करता रहा है, वहीं दूसरी तरफ सड़कों पर लगी वाहनों की लंबी कतारें जमीनी हकीकत बयां कर रही हैं।


सवाल यह है कि जब शहर की प्रमुख सड़कों पर लोग घंटों जाम में फंसे रहे, तो यातायात विभाग आखिर कहां था? आम जनता को जाम से राहत दिलाने के दावे करने वाले जिम्मेदार अधिकारी क्या केवल कागजों में ही यातायात व्यवस्था संभाल रहे हैं? सड़कों पर जाम की तस्वीरें साफ बता रही हैं कि व्यवस्था सुधारने के दावों और जमीनी हकीकत के बीच कितना बड़ा अंतर है। अब सवाल उठता है कि शहरवासियों को रोजाना जाम की परेशानी से क्या कभी निजात मिल सकेगी और हॉ तो आखिर कब तक, और दूसरा जब विकास के लिए फंड की कमी नही है, तो क्या क्रियान्वयन एजेंसी नगर निगम प्रशासन और पीडब्ल्यू विभाग के अफसर ठेकेदारों पर दबाव नही बना सड़क नही बनवा पा रहे,,,?

ट्रैफिक व्यवस्था बोले तो vip मूवमेंट और टारगेट…

ट्रैफिक व्यवस्था बनाने शहर में चल क्या रहा, सड़को के हालात है क्या सब देख रहे है। अमले पर व्यवस्था बनाने से ज्यादा दबाव टारगेट, धनलक्ष्मी आईटीएमएस और vip मूमवमेंट पर जो है।

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