
0 स्तन रोगों की पहचान प्रबंधन और उपचार पद्धति की दी गई जानकारी

0 विशेषज्ञों ने कहा निदान संभव है, समय- समय पर जांच ही बचाव
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (CIMS), बिलासपुर के रेडियोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह की अध्यक्षता में शनिवार 14 फरवरी को
“मेडिकल इमेजिंग टू माइक्रोस्कोपी – इंटीग्रेटेड डिसीजन मेकिंग इन ब्रेस्ट डिजीज” विषय पर एक राज्य स्तरीय सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम (CME) का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. शहनाज बानो एवं डॉ. अमन अग्रवाल द्वारा किया गया। व्यापार विहार के एक होटल में सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित इस शैक्षणिक कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्तन रोगों की पहचान एवं प्रबंधन में इमेजिंग (मेमोग्राफी, अल्ट्रासाउंड, MRI) से लेकर माइक्रोस्कोपी (FNAC, बायोप्सी, हिस्टोपैथोलॉजी) तक की समन्वित निर्णय प्रक्रिया को विशेषज्ञों ने बताया । CME में देश एवं प्रदेश के जाने-माने विशेषज्ञों सहित बिलासपुर तथा राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 120 रेडियोडायग्नोसिस, पैथोलॉजी एवं अन्य विशेषज्ञ चिकित्सकों ने सक्रिय सहभागिता की।


विशेषज्ञों ने अपने व्याख्यान में बताया कि समय पर जांच, सटीक इमेजिंग तथा पैथोलॉजिकल पुष्टि के माध्यम से स्तन कैंसर का प्रारंभिक चरण में निदान संभव है, जिससे उपचार के परिणाम बेहतर होते हैं और मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में स्तन कैंसर भारत में महिलाओं में होने वाला सबसे सामान्य कैंसर बन चुका है। बदलती जीवनशैली, देर से विवाह, स्तनपान में कमी, मोटापा तथा जागरूकता की कमी इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। विशेषज्ञों ने 40 वर्ष से अधिक आयु की प्रत्येक महिला को नियमित मेमोग्राफी कराने तथा किसी भी गांठ, निप्पल से स्राव, त्वचा में परिवर्तन या दर्द को नजरअंदाज न करने की सलाह दी।
सामाजिक दृष्टि से भी स्तन स्वास्थ्य को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए विशेषज्ञों ने कहा कि ग्रामीण एवं अर्धशहरी क्षेत्रों में झिझक, संकोच और मिथकों के कारण महिलाएं समय पर जांच नहीं करातीं। कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि स्तन कैंसर अब “छिपाने योग्य” नहीं बल्कि “समय रहते पहचानने योग्य” रोग है। परिवार और समाज की सकारात्मक भूमिका, जागरूकता अभियान तथा नियमित स्वास्थ्य परीक्षण से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों एवं स्तन कैंसर स्क्रीनिंग पहलों पर भी चर्चा की गई तथा चिकित्सकों से अपने-अपने क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने की अपील की गई। ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ. अर्चना सिंह ने कहा कि, “Integrated decision making ही भविष्य की दिशा है — जब रेडियोलॉजी और पैथोलॉजी साथ मिलकर कार्य करती हैं, तभी रोगी को सर्वोत्तम एवं समयबद्ध उपचार मिल पाता है।” इसी उद्देश्य को लेकर इस इंटीग्रेटेड CME का आयोजन किया गया।
इस CME के संरक्षक डॉ. रमेश मूर्ति, डीन CIMS तथा सह-संरक्षक डॉ. भानु प्रताप सिंह, चिकित्सा अधीक्षक सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल थे। कार्यक्रम के मुख्य वक्ताओं में AIIMS रायपुर से डॉ. राकेश गुप्ता, अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर से डॉ. पवन गुप्ता, GE हेल्थकेयर मुंबई से डॉ. रोहिणी पांडे तथा CIMS से डॉ. अर्चना सिंह, डॉ. सुपर्णा गांगुली, डॉ. रश्मी साव, डॉ. अमित श्रीवास्तव और डॉ. अमन अग्रवाल शामिल थे।
समारोह में छत्तीसगढ़ IRIA के अध्यक्ष एवं एम्स रायपुर के रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. नरेंद्र बोधे, अपोलो अस्पताल के वरिष्ठ रेडियोलॉजी सलाहकार डॉ. मुकुल श्रीवास्तव तथा वरिष्ठ रेडियोलॉजिस्ट डॉ. पिपरसानिया की गरिमामयी उपस्थिति रही।
यह CME चिकित्सकों के लिए न केवल ज्ञानवर्धक सिद्ध हुआ, बल्कि समाज में स्तन स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित होगा।
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