
0 अस्थाई पटाखा कारोबारियो ने कहा उनपे करम हमसे सितम क्यो…
0 दूर हो भय और कोताही हो ठोस कार्रवाई
बिलासपुर/ दिवाली पर्व के मद्देनजर शहर में 5-5अस्थाई पटाखा बाज़ार के बावजूद व्यस्ततम रिहायशी और मार्केट एरिया में पटाखों के अवैध भंडारण और बिक्री ने एक बार फिर नागरिकों के लिए चिंता व भय का माहौल खड़ा कर दिया है। सारा शहर बारूद के मुहाने पर है और सुरक्षा इंतजामो का क्या हाल है ये भी किसी से छिपा नही है। सवाल यह उठ रहा कि ऐसे में कोई बड़ी अनहोनी हुई तो जिम्मेदार कौन होगा और आखिर कब तक आमजनमानस के जीवन से ऐसा खिलवाड़ होता रहेगा।
हर साल की तरह इस बरस भी शहर में नगर निगम व जिला प्रशासन द्वारा अरपा तट के किनारे रिवर व्यू रोड, तोरवा, तिफरा, सकरी और सिरगिट्टी में अस्थाई पटाखा बाजार की अनुमति दी गई है। बावजूद इसके गोलबाजार, शनिचरी, तेलीपारा, खपरगंज,सरजू बगीचा रोड, जूनीलाइन, व्यापार विहार, बृहस्पतिबाजार, सिंधी कालोनी, मध्यंनगरी अरपापार सीपत चौक, नूतन चौक, बसंत विहार चौक, लिंगियाडीह, कुदुदंड समेत शहर के रिहायशी इलाकों के गली कूचे से लेकर खचाखच भीड़ भरे मार्केट में धड़ल्ले से पटाखों के अवैध भंडारण और बिक्री का खेल बेखौफ जारी है।
सवाल यह उठ रहा कि ऐसे में यदि कोई अनहोनी हुई तो क्या प्रशासन के पास इसके निदान के लिए क्या पर्याप्त संसाधन और प्रशिक्षित अमला है और यदि नही तो आमजनमानस के जीवन से इस कदर खुला खिलवाड़ क्यो…?
हमी पर डंडा क्यो…?
अरपा तट रिवर व्यू के अस्थाई पटाखा कारोबारियो का कहना है कि वे नियमो के तहत अस्थाई पटाखा बाज़ार में बकायदा शुल्क अदा कर कारोबार करते है तो उन पर दबाव बनाया जाता है चेकिंग की जाती है, तो अस्थाई पटाखा बाजार के बाहर व्यस्ततम रिहायशी और मार्केट एरिया के कारोबारियो पर कार्रवाई क्यो नही की जाती जबकि वे हर वर्ष प्रशासन से इसकी मांग करते है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि इस पर रोक लग सके अच्छा संदेश जाए,,,
इनकी दूसरी मांग यह है कि जब वे सारे शुल्क की अदायगी कर रहे तो प्रशासन उन्हें सुरक्षा मुहैया कराए पटाखा बाजार में पिछले कुछ सालों से दमकल ही नही दिया जा रहा मौके पर 24 घण्टे 1 दमकल खड़ी कराई जाए ताकि कोई बड़ी अनहोनी न हो।
क्या कह रहे व्यापारी और जिम्मेदार
सीजीडीएनए की टीम ने आमजनमानस के जीवन से इस खुले खिलवाड़ को लेकर होमगार्ड के…. और फायर ब्रिगेड प्रभारी…. और रिवर व्यू अस्थाई पटाखा कारोबारियो से चर्चा की सुनिए वे क्या कह रहे….!
