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बिलासपुर को जशपुर से भी बड़ा नागलोक बनाने के मामले में अब तक 17 एफआईआर, उठ रहे सवाल कार्रवाई का ढिंढोरा बजेगा या पकड़े जाएंगे फर्जी मुआवजा डकार सरकार को लाखों- करोड़ों का झटका देने वाले…

बिलासपुर / न्यायधानी को नागलोक बनाने वाले चर्चित सर्पदंश मुआवजा घोटाले में बिलासपुर पुलिस ने 14 मामलों में एफआईआर दर्ज किया है। अब तक 17 संदिग्ध प्रकरणों में अपराध दर्ज किए जा चुके हैं।
पहले तीन मामलों में अलग-अलग थानों में अपराध दर्ज किया गया था। जांच के दौरान मिले नए तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर 14 और मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है।
नए दर्ज मामलों में पांच एफआईआर सरकंडा थाना क्षेत्र में, तीन मामले कोनी थाना, तीन सिविल लाइन थाना, एक तोरवा थाना और एक मामला सिटी कोतवाली थाना में दर्ज किया गया है। सभी मामलों में अलग-अलग आरोपियों के खिलाफ अपराध कायम कर जांच शुरू कर दी गई है।

सूत्रों के अनुसार इस फर्जीवाड़े में केवल आवेदक ही नहीं बल्कि डॉक्टर, वकील, पुलिस कर्मी और मृतकों के परिजनों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। इसी आधार पर कई लोगों को आरोपी बनाया गया है। कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है, जबकि दस्तावेजों और रिकॉर्ड की भी बारीकी से जांच की जा रही है। प्रशासनिक स्तर पर भी दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी चल रही है। बताया जा रहा कि ज्यादातर मामले में एक ही फोटोकॉपी और दस्तावेज संलग्न कर खेला किया गया है।

किसी को कुछ पता नही, सुशांत ने सदन में नागलोक का मामला उठाया

छत्तीसगढ़ के नागलोक कहे जाने वाले जशपुर जिले से भी अधिक सर्पदंश से मौत बिलासपुर में दर्ज होने के मामले को जब बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने विधानसभा में उठाया तब शासन-प्रशासन हरकत में आया, जांच में फर्जी मौतों और मुआवजा दावों का बड़ा नेटवर्क सामने आने पर एफआईआर और कार्रवाई जारी है। यदि इस मामले में सख्ती से जांच हुई तो ऐसे-ऐसे सफेदपोश बेनकाब होंगे जिसकी कल्पना नही की जा सकती। लाखो – करोड़ो के इस खेल में बड़े- बड़े लोग शामिल है।

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शैलेन्द्र पाण्डेय / संपादक / मोबाइल नंबर : 7000256145
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