
0 निगम के भवन शाखा में खदमदाया माहौल

0 ढूंढे जा रहे आंकड़ों के बाजीगरी वाले प्रोफार्मा
बिलासपुर / सुप्रीम कोर्ट के एक फरमान ने निगम के अफसरो का टोंटा सूखा दिया।
दरअसल सर्वोच्च न्यायालय ने विभिन्न राज्यों के नगरीय निकायों द्वारा प्रस्तुत अभिलेखों के परीक्षण के दौरान देश के विभिन्न नगरों में स्वीकृत मानचित्र के विपरीत व्यापक स्तर पर अनधिकृत निर्माण होना और अनेक प्रकरणों में सक्षम प्राधिकारी द्वारा स्वीकृत मानचित्र से मिले अधिक निर्माण से जनसुरक्षा पर गंभीर खतरे का हवाला दे
ग़म्भीर टिप्पणी भी की कि ये
प्रशासनिक शिथिलता या अधिकारियों व उल्लंघनकर्ताओं के मध्य मिलीभगत की ओर संकेत करता है ।
सर्वोच्चय न्यायालय ने
सभी राज्यों एवं संबंधित प्राधिकरणों को अनधिकृत भवन निर्माण के विरुद्ध औपचारिक कार्यवाही न करते हुए ऐसे निर्माणकर्ताओं के खिलाफ़ सीलिंग, ध्वस्तीकरण और अन्य दंडात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए है।
ऐसा नई चलेगा
सर्वोच्चय न्यायालय ने निकायों के अध्यक्ष/मुख्य कार्यपालन अधिकारी/आयुक्त विभागाध्यक्ष/ अथवा समकक्ष अधिकारी से शपथ पत्र में जवाब मांगा है कि कितने प्रकरणों में नोटिस जारी किए गए, कितने भवन सील किए गए, कितने अवैध निर्माण हटाए गए, कितने प्रकरणों में कार्रवाई की गई। कार्रवाईयो प्रकृति, लंबित अपीलों के निराकरण की स्थिति की जानकारी मांगा है।
लंबित अपीलों एवं प्रकरणों का तीन माह के भीतर निराकरण करने निर्देश
सर्वोच्चय न्यायालय ने
भवन अनुज्ञा उल्लंघन, अनधिकृत निर्माण, भूमि उपयोग परिवर्तन आदि से संबंधित लंबित अपीलों एवं प्रकरणों का यथासंभव तीन माह के भीतर निराकरण सुनिश्चित कर नवीन शपथ-पत्र प्रस्तुत करने निर्देश दिया गया है।
अवैध निर्माणकर्ता ही नही अफसर भी होंगे जिम्मेदार
सर्वोच्चय न्यायालय ने कहा है कि भवन अनुज्ञा के विपरीत निर्माण की नियमों की अवहेलना है अवैध निर्माण है इसके लिए केवल भवन स्वामी उत्तरदायी नहीं है बल्कि सम्बंधित नगर विकास प्राधिकरण/नगर निगम/नगर निकाय भी उत्तरदायी होंगे, क्योंकि भवन अनुज्ञा देना, भवन उपविधियों का प्रवर्तन,
भूमि उपयोग का विनियमन व निर्माण की निगरानी अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही कि वे न्यायालय के समक्ष सत्य तथ्यों को प्रस्तुत करें। भ्रामक जानकारी देने पर संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होंगे। ऐसा पाए जाने पर सम्बंधित अफसरो के खिलाफ अवमानना के कार्रवाई के निर्देश दिए गए है।
भारत सरकार, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय भी होंगे पक्षकार
सर्वोच्चय न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि शिकायतों का परीक्षण अमीकस क्यूरी द्वारा किया जाएगा तथा आवश्यकतानुसार संबंधित प्राधिकरणों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
चूंकि विषय राष्ट्रीय महत्व का है, इसलिए भारत सरकार, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) को भी वाद में पक्षकार बनाया गया है।
ये है निर्देश
- राज्य के समस्त नगरीय निकायों में अनधिकृत भवन निर्माणों का विशेष सर्वेक्षण कराने।
- स्वीकृत मानचित्र से विपरीत प्रकरणों की पृथक सूची तैयार करने।
- सभी प्रकरणों में नोटिस, सीलिंग, ध्वस्तीकरण अथवा अन्य वैधानिक कार्रवाई समयबद्ध रूप से सुनिश्चित करने।
- भवन अनुज्ञा के अंतर्गत स्वीकृति, निरीक्षण, पूर्णता प्रमाण-पत्र एवं अधिभोग प्रमाण-पत्र के प्रक्रिया की समीक्षा कराने।
- भवन निर्माण उल्लंघन संबंधी लंबित अपीलों का तीन माह के अंदर निराकरण सुनिश्चित करने।
- नगरीय निकायो द्वारा अब तक की गई कार्रवाई का तथ्यात्मक प्रतिवेदन तैयार कराने।
- अनधिकृत निर्माण के संबंध में व्यक्तिगत उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए न्यायालय के निर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित कराने कहा गया है।
- 70 वार्डो में 900 अवैध
बीच गोलबाजार में आगजनी के बाद मरम्मत के आवेदन पर दो मंजिला काम्प्लेक्स तनने और जनदर्शन में शिकायत के बाद भी कोई कडरवाई न होने का मामला जब हाईकोर्ट पहुँचा निगम प्रशासन ने शहर के 70 वार्डो में 900 अवैध निर्माण होने का शपथ पत्र प्रस्तुत किया था। यानि एक- एक वार्ड में 12-13 अवैध निर्माण बताकर जिम्मेदारों ने उस समय तो अपनी चमड़ी बचा ली लेकिन अवैध निर्माण की तादात इससे कई गुना अधिक है अब देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट के फरमान के बाद कितने की चिड़िया बिठाई जाती है।
रिहर्सल तेज
सुप्रीम न्यायालय के इस आशय के आदेश के बाद भवन अनुज्ञा से सम्बंधित फाइलो की उठापटक जारी है। नई – पुरानी फाइलो को खण्दोला जा रहा। समरी तैयार की जा रही कि भवन अनुज्ञा के कितने आवेदन आये, कितने को स्वीकृति दी गई है, कितने को रोका गया है, क्यो रोका गया है, कितने लोगों ने जारी अनुज्ञा के विपरीत या बिना अनुज्ञा के निर्माण करा लिया है, अवैध निर्माणकर्ताओं का वर्तमान स्टेटस क्या है, उन्हें कब कब और कितने बार नोटिस् जारी किया गया, नोटिस के बाद क्या कार्रवाई की गई।
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सुप्रीम न्यायालय का ये आदेश आज ही मुख्यालय रायपुर से यहां पहुँचा है। सभी जोन कमिश्नरों को आदेश की प्रति भेज भवन अनुज्ञा और वैध अवैध निर्माण की जानकारी भेजने कहा गया है। उच्चाधिकारियों से निर्देश लेकर पहले फेज में मुख्यमार्गों के भवनों का सर्वे कराया जाएगा फिर बाद में अंदर के भवनों का।
अनुपम तिवारी भवन शाखा प्रभारी नगर निगम बिलासपुर
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