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बोर्ड पर ‘दलाल बैन’, सिस्टम में ‘एजेंट ही चैन’…! RTO दफ्तर से फिटनेस सेंटर तक ‘लक्ष्मी दर्शन’ का खेल…?

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फिटनेस सेंटर- मटियारी- बेलतरा रोड

बिलासपुर। वाकई बिलासपुर का क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय अब सरकारी दफ्तर कम और ‘लक्ष्मी दर्शन’ का ठिकाना ज्यादा नजर आने लगा है! आरोप है कि यहां बिना दलाल या कथित चढ़ावे के काम कराना आसान नहीं। रही-सही कसर RTO कार्यालय से करीब पांच किलोमीटर दूर मटियारी-बेलतरा बाईपास स्थित निजी फिटनेस सेंटर पूरी करता दिखाई देता है। यहां बोर्ड पर बड़े-बड़े अक्षरों में ‘दलालों की एंट्री प्रतिबंधित’ लिखा है, लेकिन मौके पर गाड़ियों, वाहन मालिकों, रेडियम पट्टी बेचने वालों और कथित एजेंटों की भीड़ कुछ दूसरी ही कहानी बयां करती नजर आई।

शुक्रवार को CGDNA की टीम ने लगरा स्थित RTO कार्यालय और मटियारी-बेलतरा बाईपास रोड स्थित रॉबिन आई सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड के फिटनेस सेंटर का जायजा लिया। RTO कार्यालय में अधिकारी का चेंबर खाली मिला।

साहब के चेम्बर में मिलने और शिकायत सुनने के समय का उल्लेख साहब नदारद

वहीं निजी फिटनेस सेंटर के बाहर वाहनों और वाहन मालिकों के साथ कथित एजेंटों की मौजूदगी बनी रही। कैमरे के सामने आने से कई लोगों ने इनकार किया, लेकिन बातचीत में व्यवस्था से जुड़ी कई जानकारियां सामने रखीं। उनका तर्क भी सीधा था—‘रोजगार का सवाल है, रोज यहां आना पड़ता है।’

बोर्ड पर एजेंट को प्रवेश की अनुमति नही

ये है सिस्टम!

फिटनेस के लिए वाहन मालिकों से आरसी बुक, बीमा, स्पीड गवर्नर और जीपीएस समेत विभिन्न दस्तावेज मांगे जाने की जानकारी दी गई। बताया गया कि ऑनलाइन फिटनेस फीस करीब 800 रुपए है, जबकि 7 मीटर रेडियम पट्टी के लिए 1200 रुपए शुल्क बताया गया।
लेकिन इसके बाद कहानी में कथित ‘एजेंट सिस्टम’ की एंट्री होती है। मौके पर मौजूद लोगों से मिली जानकारी के मुताबिक, बिना एजेंट फिटनेस कराना मुश्किल बताया गया। दावा यहां तक किया गया कि दस्तावेज पूरे होने के बावजूद सीधे पहुंचने वाले वाहन मालिक को फिटनेस में ‘ओके’ मिलना आसान नहीं है।

सेंटर के गेट पर फिटनेस के लिए कतारबद्ध खड़ी गाड़िया

ये है रेट!—

जीपीएस से फिटनेस तक ‘पैकेज’ का खेल?
मौके पर मिली जानकारी के अनुसार फिटनेस के लिए 13 हजार रुपए जीपीएस और 5 हजार रुपए फिटनेस सर्टिफिकेट के नाम पर लिए जाने की बात कही गई। वहीं कथित एजेंट के माध्यम से जाने पर बिना जीपीएस फिटनेस कराने के लिए 10 हजार रुपए का अलग इंतजाम होने का दावा किया गया।
इतना ही नहीं, हाइवा के एस्ट्रा डाला, क्षतिग्रस्त विंडस्क्रीन (गाड़ी के सामने का शीशा टूटने) और वाहनों की अन्य कमियों के लिए भी अलग-अलग रकम तय होने की जानकारी सामने आई।

बोर्ड पर दलाल बैन, बाहर ‘एजेंट चैन’?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि निजी फिटनेस सेंटर में दलालों की एंट्री प्रतिबंधित है, तो फिर वाहन मालिकों को कथित एजेंटों के जरिए काम कराने की जरूरत क्यों बताई जा रही है? अगर सारे काम ऑनलाइन और पारदर्शी तरीके से हो सकते हैं, तो फिर कथित ‘रेट’ और ‘पैकेज’ की चर्चा आखिर क्यों?
यानी बोर्ड कुछ और कह रहा है और मौके की तस्वीर कुछ और कहानी सुना रही है। ‘दलाल मुक्त व्यवस्था’ का बोर्ड टंगा है, लेकिन वाहन मालिकों के बीच कथित एजेंट सिस्टम की चर्चा जारी है।

ढाई साल में 5 किलोमीटर का सफर

बताया गया कि दो-” ढाई साल पहले तक RTO दफ्तर परिसर में ही फिटनेस जांच की प्रक्रिया की जाती थी जो
फिटनेस का काम निजी संस्था को सौंपे जाने के बाद अब
आरटीओ दफ्तर से पांच किलोमीटर दूर मटियारी-बेलतरा बाईपास रोड स्थित निजी फिटनेस सेंटर में स्थानांतरित हो गई।
अब सवाल व्यवस्था पर है—सरकारी दफ्तर से पांच किलोमीटर दूर निजी सेंटर में वाहन फिटनेस की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है? कथित एजेंटों की भूमिका क्या है? और बिना एजेंट पहुंचने वाले वाहन मालिकों को वास्तव में किन दिक्कतों का सामना करना पड़ता है?
सवाल यह उठ रहा कि जब बोर्ड पर ‘दलाल बैन’ है तो फिर इस तरह की बाते और ग़म्भीर आरोप क्यो…? क्यो यहां एजेंटों की भीड़ और कथित रेट-कार्ड का हल्ला हो रहा और यदि आरोपों में दम है तो ‘सिस्टम’ पर कार्रवाई कब होगी?

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