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5 साल नौकरी करवाई, अब बोला—गलती हो गई, 42 राज्य कर निरीक्षकों को फिर बनाया लिपिक, विभाग की चयन प्रक्रिया पर सवाल, कर्मचारियों में आक्रोश “साहब गलती आपकी, सजा हमारी क्यों?” संघ ने आंदोलन का दिया अल्टीमेटम…

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रायपुर,,, छत्तीसगढ़ वाणिज्यिक कर / राज्य कर विभाग में विभागीय चयन प्रक्रिया में भारी अनियमितता और प्राकृतिक न्याय के विरुद्ध लिया गया… एक फैसला सामने आया है! जिसने पूरे प्रदेश के कर्मचारी जगत को झकझोर कर रख दिया है!
वर्ष 2021 एवं 2022 में विभाग द्वारा आयोजित विभागीय परीक्षा के माध्यम से लिपिक वर्ग के 42 योग्य कर्मचारियों का चयन लिखित परीक्षा एवं समस्त औपचारिक प्रक्रिया पूर्ण करने के पश्चात राज्य कर निरीक्षक के पद पर किया गया था…. चयनित सभी कर्मचारियों ने पिछले लगभग पाँच वर्षों से पूरी निष्ठा, ईमानदारी और कर्तव्यपरायणता के साथ राज्य कर निरीक्षक के पद पर सेवाएं दी हैं!
किन्तु दिनांक 11 सितंबर 2026 को अचानक एक आदेश जारी कर इन 42 राज्य कर निरीक्षकों की नियुक्ति / पदोन्नति प्रक्रिया को निरस्त करते हुए उन्हें उनके मूल पद (लिपिक) पर प्रत्यावर्तित (Revert) कर दिया गया… इस तुगलकी फरमान के बाद विभाग के कर्मचारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है!
कर्मचारियों का सीधा सवाल – विभाग की त्रुटि की सजा हमें क्यों ?
कर्मचारियों का कहना है! कि चयन प्रक्रिया का आयोजन, प्रश्नपत्र तैयार करना, उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन, अभिलेखों का सत्यापन, मेरिट सूची बनाना और अंतिम नियुक्ति आदेश जारी करना – ये सभी कार्य विभाग और विभागीय चयन समिति के अधीन थे… कर्मचारी केवल आवेदक के रूप में प्रक्रिया में शामिल हुए थे…
यदि प्रक्रिया में कोई त्रुटि थी… तो उसकी जिम्मेदारी प्रक्रिया आयोजित करने वाले अधिकारियों की है, न कि चयनित कर्मचारियों की। पाँच साल तक सेवा लेने के बाद अब उन्हें दंडित करना कहाँ का न्याय है?
यह निर्णय न केवल प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है, बल्कि बिना पक्ष सुने (No Hearing) एकतरफा लिया गया निर्णय है।
छ.ग. प्रदेश लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ ने की कड़ी निंदा
इस पूरे मामले पर छत्तीसगढ़ प्रदेश लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा –

“यह छत्तीसगढ़ के कर्मचारी इतिहास का सबसे दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय है। हमारे 42 साथियों ने विभाग की परीक्षा दी, विभाग ने उन्हें पास किया और 5 साल तक उनसे अधिकारी का काम लिया। आज विभाग अपनी ही प्रक्रिया को गलत बता रहा है। यह सरासर अन्याय है।विभाग अपनी गलती छुपाने के लिए कर्मचारियों को बलि का बकरा बना रहा है। हम इस निर्णय की घोर निंदा करते हैं। हमारा संघ इस लड़ाई में अपने 42 साथियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।हमारी शासन से मांग है कि इस निरस्तीकरण आदेश को तत्काल वापस लिया जाए, दोषी अधिकारियों पर कार्यवाही की जाए और हमारे कर्मचारियों को न्याय दिया जाए। यदि शीघ्र न्याय नहीं मिला तो संघ उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।”इस विषय पर संघ शीघ्र आंदोलन घोषित करेगा
जारी कर्ता

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