0 नई नगर सरकार भूल गई 77 लाख का एफडीआर कांड, दावा था कार्रवाई का सामान्य सभा मे किसी ने नही की चू चां

0 कौन है साढ़े 400 करोड़ की बर्बादी का जिम्मेदार, क्या जिम्मेदारों से होगी वसूली

बिलासपुर। 77 लाख रुपए के एफडीआर कांड के अमानत में खयानत के मामले में जनता के जनप्रतिनिधियों ने चूप्पी साध ली। दावा था कि किसी भी भृष्टाचारी को नही बख्शा जाएगा पर किसी ने इस मुद्दे का नाम तक नही लिया।
नवनिर्वाचित नगर सरकार की पहली सामान्य सभा और बजट सत्र मंगलवार को सम्पन्न हो गया। पर सामान्य सभा में भाजपा पार्षद मेयर किसी ने भी 77 लाख के एफडीआर कांड पर कार्यवाही के लिए आवाज नहीं उठाई, जबकि नगरीय निकाय चुनाव के ठीक पहले पूर्व मंत्री व नगर विधायक ने इस मुद्दे को अपनी घोषणापत्र में सबसे ऊपर प्रिंट करा इसे प्रमुखता से उठाते हुए दावा किया था कि एफडीआर कांड के ठेकेदार और इसमें शामिल अफसर कर्मचारियों को नही बख्शा जाएगा। पब्लिक को उम्मीद थी भाजपा ने वादा किया नगर निगम के ऐसे ठेकेदार जो अमानत में खयानत कर रहे उनको बक्सा नहीं जाएगा फिर भी विधायक के इस दावे के बावजूद महापौर, पार्षद , और एमआईसी सदस्य पता नही क्यो मौन रहे।
हालांकि हाल ही में निगम प्रशासन ने इस ठेकेदार को ब्लैक लिस्टेड करने का दावा किया था। बताया जा रहा कि इस मामले में पार्टी के ही एक विधायक और दो छात्रनेताओं की मांडवाली की बात सामने आई थी इसलिए अब चुनावी दावे को फाइनल टच देकर ठंडा किया जा रहा।

चर्चा इस बात को लेकर है कि उस ठेकेदार के एक फर्म को ब्लैक लिस्टेड कर एक तीर से कई निशाना साधा गया, बदले में उसके दो फर्म को भरपूर काम दिया गया है। इससे मांडवाली वाले विधायक और दो छात्र नेता भी खुश, पूर्व मंत्री और विधायक की बात भी रख ली गई पब्लिक का क्या है उन्हें तो सिर्फ सन्देश ही न देना है।
इसी तरह शहर को गन्दगी और मच्छरमुक्त करने के दावे वाले पूर्व मंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट सिवरेज का काम करने वाले उस सिंपलेक्स कंपनी को भी ब्लैक लिस्टेड कर उसके 30 करोड़ की अमानत राशि राज सात करने ढिंढोरा पीटा जा रहा, जिसने बेतरतीब सड़को की खुदाई कर जनता की गाढ़ी कमाई के 450 करोड़ रुपये जमीन के अंदर दफन कर दिए, कई लोग हताहत हुए कई मौते हुई शहरवासियों को कीचड़ से सराबोर और खचाडी सड़कों पर चलना और दुर्घटनाग्रस्त होना पड़ा उसको 30 करोड़ का फटका क्या फटका है।
इधर मेयर ब्लैकलिस्टेड टर्मिनेट सिंपलेक्स कंपनी पर ठोस कार्रवाई का दबाव बनाने के बजाय 17 साल बाद भी अधूरी पड़ी सीवरेज परियोजना का कार्य पुनः कराने बयान दे रही है।
पब्लिक कह रही कि आरोप प्रत्यारोप जांच रिपोर्ट इन्हीं सब में जनप्रतिनिधि 5 साल निकाल दे रहे जिसके चलते सरकारे आ जा रही पर जनताबके मनमुताबिक काम नही हो रहे
समस्या जस की तस बनी हुई है।
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