
बिलासपुर,,,, थाना सिविल लाइन पुलिस की ओर से जारी की गई हालिया प्रेस विज्ञप्ति ने खुद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि 7 लोगों को जुआ खेलते हुए पकड़ा गया। साथ ही 4 असामाजिक तत्वों के विरुद्ध प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जानकारी भी दी गई है, लेकिन जुआरियों में 6 का ही नाम जारी किया गया है, आखिर सातवां कौन ?
हालांकि, जब विज्ञप्ति में दिए गए नामों की जांच की गई, तो कई विसंगतियां सामने आईं। पुलिस ने दावा तो 7 जुआरियों को पकड़ा गया है, लेकिन जारी सूची में केवल 6 नाम ही दिए गए हैं। वहीं दूसरी ओर, अशांति फैलाने वाले 4 लोगों के नाम दर्ज किए गए हैं। इस तरह, दोनों सूचियों को मिलाकर कुल 10 लोगों का ही उल्लेख मिलता है, जबकि पुलिस ने प्रेस विज्ञप्ति में 11 व्यक्तियों पर कार्रवाई का दावा किया है। यह स्पष्ट विरोधाभास अब सवालों को जन्म दे रहा है कि आखिर सातवें जुआरी का नाम पुलिस की सूची से गायब क्यों है? क्या यह लापरवाही है, या फिर किसी को जानबूझकर छिपाने की कोशिश की गई है?
पुलिस की दी गई जुआरियों की सूची में शामिल हैं —
1. देवराज यादव
2. सौरभ सिंह
3. सतीश साहू
4. वेदप्रकाश कौशले
5. अभिषेक एक्का
6. बल्लू सूर्यवंशी
सूची में सातवें व्यक्ति का नाम पूरी तरह से गायब है। वहीं, अशांति फैलाने वाले श्रेणी में चार लोगों के नाम दर्ज हैं जिसमें दीपू यादव, आकाश राव उर्फ टिल्लू, आदित्य सिंगरौल और सिद्धार्थ यादव उर्फ सिबु शामिल हैं।
प्रेस रिलीज में ही विरोधाभास
यानी कुल नाम हुए दस। जबकि पुलिस ने स्वयं प्रेस विज्ञप्ति में लिखा है 7 व्यक्तियों को जुआ खेलते हुए पकड़ा गया तथा कुल 10 असामाजिक तत्वों के विरुद्ध प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई। लेकिन अगर 7 जुआरी और 4 असामाजिक तत्व जोड़े जाएं, तो कुल संख्या 11 होती है। जाहिर है कि पुलिस के बयान और जारी की गई सूची में विरोधाभास है।
पुलिस की विश्वनीयता और आंकड़ों पर सवाल
सूत्रों के अनुसार, यह संभव है कि कार्रवाई के दौरान एक व्यक्ति का नाम चूक या टाइपिंग त्रुटि के कारण सूची से छूट गया हो। या जल्दबाजी में छै की जगह सात लिखा गया होगा।लेकिन प्रश्न यह भी उठता है कि क्या बिना नाम की पुष्टि किए प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी गई ? हालांकि, इस संबंध में सिविल लाइन सीएसपी निमितेश सिंह ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में चूक होने का हवाला दिया गया।फिलहाल यह घटना न केवल पुलिस के आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा कर रही है, बल्कि यह भी दिखाती है कि आधिकारिक सूचनाओं में पारदर्शिता की कितनी आवश्यकता है, लेकिन आखिरी सवाल यही है कि आखिर सातवां जुआरी कौन ?

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