
*0 तो क्या ऐसे चल रहा जंगल मे जंगली जानवर का शिकार और रिसोर्ट में पार्टियों का दौर…*

0 पकड़े गए तो आरोपी, नही तो रंगदार…

बिलासपुर । बेलगहना वन परिक्षेत्र कुरदर के पर्यटन मंडल के रिसॉर्ट में मिले हिरण के मांस ने जाहिर कर दिया कि छत्तीसगढ़ के जंगलात और निजी रिसोर्ट में चल क्या रहा है।वन विभाग का अमला पहुंच गया और रिसॉर्ट के मैनेजर सहित चार कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। वन विभाग की टीम ने मांस का सैम्पल जांच के लिए जबलपुर स्थित लेबोरेट्री भेजा है। लैब की रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। मामला हिरण के शिकार और हिरण के गोश्त को पकाने का है।
छत्तीसगढ़ के जंगलों में शिकारियों का दबदबा आज भी कायम है, तभी तो हिरण का शिकार कर जंगल से मांस सीधे पर्यटन मंडल के रिसार्ट पहुंच गया। रिसार्ट में कुक के द्वारा किचन में हिरण का मांस पकाया जा रहा था। मांस पकाने के बाद पार्टी की तैयारी थी। तभी वन विभाग की टीम ने रिसार्ट में छापेमारी कर हिरण का पका मांस बरामद कर लिया।

पूरा मामला कोटा क्षेत्र के बेलगहना स्थित कुरदर के एथनिक रिसार्ट का है। वन विभाग की टीम ने शुक्रवार को बेलगहना वन परिक्षेत्र के कुरदर स्थित प्राइवेट रिसॉर्ट में हिरण का शिकार कर उसके मांस को पकाने की सूचना पर जब रिसार्ट में दबिश दी तो किचन में कुक द्वारा कड़ाही में मांस पकाया जा रहा था। जांच में पता चला कि एथनिक रिसार्ट का संचालन पर्यटन मंडल द्वारा किया जा रहा है। जहा मंडल के 8 से 10 कर्मचारियों की तैनाती है। यहां कुक द्वारा रिसॉर्ट के मैनेजर और कर्मचारियों के लिए हिरण का मीट बनाया जा रहा था। टीम ने कुक रामकुमार टोप्पो, रिसॉर्ट के मैनेजर रजनीश सिंह, रमेश यादव व संजय वर्मा को पकड़ा है। उनके खिलाफ वन्यजीव संरक्षण कानून के उल्लंघन का केस दर्ज किया गया है।

मढ़ दिया दोष, फिर कुक ने बताया
पूछताछ में रिसोर्ट के मैनेजर रजनीश सिंह ने अपना बचाव करते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता मांस किसका है। उन्होंने पूरा दोष कुक रामकुमार टोप्पो पर मढ़ दिया। इधर कुक रामकुमार ने बताया कि गांव के जनक बैगा ने पत्ते में मांस लाकर दिया था, जिसे वह साहब लोगों के लिए पका रहा था। बयान दर्ज कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
ऐसे दे रहे पर्यटन को बढ़ावा
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के बेलगहना का यह कुरदार हील ईको रिसोर्ट केंद्र सरकार की ‘स्वदेश दर्शन योजना’ के तहत जनजातीय टूरिज्म सर्किट के अंतर्गत बनाया गया है। इस रिसोर्ट का निर्माण पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय लोगों को रोजगार प्रदान करने के लिए किया गया है, जिसका स्वामित्व मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ पर्यटन विभाग के अंतर्गत आता है और इसे स्थानीय प्रबंधन द्वारा संचालित किया जाता है।
और बैगा की तलाश जारी है…
इस मामले में अब तक की जांच में सामने आए तथ्य के आधार पर गांव के जनक बैगा की तलाश की जा रही है, जो वन विभाग के अमले की धरपकड़ के बाद हिरण के सींग की तरह गायब बताया जा रहा, अब तक कि जांच में यह बात सामने आई है कि इसी बैगा ने पत्ते में मांस लाकर रिसोर्ट में दिया था, अब सवाल यह उठ रहा कि ये हिरण का मांस मंगाया किसने था, बैगा के पास ये मांस कहा से,कैसे और किसके कहने पर आया, हिरण का शिकार किसने और किसके कहने पर किया गया, उसके पकड़ में आने के बाद तमाम रहस्य से पर्दा उठेगा और यदि बिना किसी राजनैतिक हस्तक्षेप के जांच हुई तो कई बड़े चौकाने वाले नामो के सामने आने की उम्मीद है…?
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