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हाईकोर्ट ने चर्चित विराट अपहरणकांड के आरोपियों की सजा के खिलाफ अपील को किया खारिज, निचली अदालत का फैसला बरकरार…

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0 आंटी ही थी अपहरण और फिरौतीकाण्ड कि मास्टरमाइंड

बिलासपुर । शहर के चर्चित विराट सराफ अपहरण और फिरौतीकाण्ड में चीफ जस्टिस ऑफ छत्तीसगढ़ रमेश सिन्हा व जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल की युगलपीठ ने तमाम सबूतों और साक्ष्य के मद्देनजर आरोपियों की सजा के खिलाफ पेश अपील को खारिज कर दिया।

कोर्ट ने कहा कि सरकारी वकील ने ये साबित कर दिया कि आरोपियों ने क्रिमिनल साज़िश के तहत फिरौती के लिए नाबालिग बच्चे को किडनैप किया गया, पहचान पत्र, इलेक्ट्रॉनिक सबूत,कॉल डिटेल, किडनैपिंग और फिरौती की मांग ये सब क्रिमिनल साज़िश के आरोप को साबित करते हैं।

ये है मामला

7 साल पहले गत 20 अप्रैल .2019 को कश्यप कालोनी निवासी कारोबारी विवेक सराफ के पुत्र विराट सराफ को घर के पास गली से अपने दोस्तों के साथ खेलते समय अपहरणकर्ता उसके मुह को छपक कार में किडनैप कर पन्ना नगर, जरहाभाटा के राजकिशोर सिंह के घर ले गए। जहाँ उसके हाथ-पैर बांध उसे एक कमरे में बंद कर 6 करोड़ की फिरौती मांगी थी। सिटी कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज कर
सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल नम्बर व अन्य साक्ष्य की जांच करते पुलिस अपहरणकांड की मास्टरमाइंड गोड़पारा निवासी विराट की बड़ी माँ नीता सराफ तक पहुँची, और बच्चे को पन्ना नगर जारहा भाठा के मकान से बरामद कर आरोपी नीता सराफ, राजकिशोर, अनिल, सतीश , हरेकृष्ण कुमार को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। विचारण न्यायालय ने सभी आरोपियों को दोषसिद्धि पर आईपीसी की धारा 120-B के तहत 14 साल की सज़ा और 10,000 रुपये के अर्थदंड और न देने पर 1 साल की अतिरिक्त सज़ा। आईपीसी की धारा 363/120-B के तहत 7 साल की सज़ा और 10,000 रुपये के का जुर्माने और जुर्माना न देने पर 1 साल के अतिरिक्त सज़ा। सेक्शन 364-A/120-B के तहत उम्रकैद और 25,000 रुपये के जुर्माने व न देने पर 3 साल के लिए अतिरिक्त R.I.। सेक्शन 365/120-B IPC के तहत 7 साल की कठोर कैद और 10,000 रुपये के जुर्माने और अदा न करने पर 1 साल के लिए अतिरिक्त R.I.। सेक्शन 368/120-B IPC के तहत 7 साल की कठोर कैद और 10,000 रुपये का जुर्माना, जुर्माना न देने पर 1 साल के लिए अतिरिक्त सजा समेत सभी सज़ाएँ एक साथ चलने का आदेश दिया है।

आरोपियो ने कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील पेश की थी । हाई कोर्ट ने आरोपियों की सजा को यथावत रखते हुए उनकी अपील को खारिज कर दिया।

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