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निलंबित आईएएस रानू साहू और उनके परिजनों की 9 याचिकाओं को हाईकोर्ट ने किया खारिज, उल्टे पड़ गया दांव अपराध से अर्जित संपत्ति का पता न चलने पर प्रवर्तन निदेशालय को उनके समान मूल्य की वैध संपत्तियों को भी अटैच करने डायरेक्शन…

रायपुर/बिलासपुर। हाईकोर्ट ने बहुचर्चित कोल लेवी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में निलंबित आईएएस रानू साहू और उनके परिजनों की 9 अपीलों को खारिज दिया। इतना ही नही कोर्ट ने अपराध से अर्जित उनकी संपत्ति का पता न चलने पर प्रवर्तन निदेशालय को उनके समान मूल्य की अन्य वैध संपत्तियों को भी अटैच करने की छूट दे दी है।
खुद रानू साहू, उनके पिता अरुण कुमार साहू, माता लक्ष्मी साहू, भाई पीयूष और पंकज साहू, बहन पूनम साहू सहित अन्य रिश्तेदार शामिल थे, जिन्होंने अपनी संपत्तियों की कुर्की को चुनौती दी थी।
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि जिन संपत्तियों को ईडी ने अटैच किया है, उनमें से कई सम्पत्तियां सन 2020 से पहले खरीदी गई थीं, वहीं ईडी ने अदालत को बताया कि संबंधित सभी लोगों ने अपनी आय का वैध स्रोत स्पष्ट नहीं किया। एजेंसी के अनुसार, छत्तीसगढ़ में कोयला परिवहन पर प्रति टन 25 रुपये की अवैध वसूली का सिंडिकेट सक्रिय था। ईडी का आरोप है कि कोरबा और रायगढ़ की कलेक्टर रहते हुए रानू साहू ने इस सिंडिकेट को संरक्षण दिया और बदले में करीब 5.52 करोड़ रुपये की रिश्वत ली। इसी रकम से परिजनों के नाम पर बेनामी संपत्तियों में निवेश किया गया। ईडी ने बताया कि अभी तक कि जांच में रानू साहू के परिजनों द्वारा महासमुंद जिले में बड़े पैमाने पर जमीन खरीदी, खरोरा में उनकी माता के नाम पर कृषि भूमि की खरीदी, कलमीदादर में अपने पिता और भाइयों के नाम पर कई खसरा नंबरों मे कई हेक्टेयर जमीन दर्ज है, साथ ही अन्य रिश्तेदारों के नाम पर भी अलग-अलग स्थानों पर भूमि खरीदी गई है। ईडी के अनुसार, यह अधिकांश खरीद उस समय हुई जब रानू साहू कोरबा में कलेक्टर थीं। 16 अक्टूबर 2022 को ईडी ने गरियाबंद जिले के पांडुका स्थित उनके मायके में छापेमारी की थी। इसके बाद बागबाहरा ब्लॉक के कलमीदादर स्थित फार्महाउस में भी जांच की गई। इस दौरान पटवारी और कर्मचारियों से पूछताछ की गई थी। जांच पड़ताल के बाद ईडी ने इन संपत्तियों को अटैच कर लिया था,
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने दोनो पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्य और जिरह के आधार पर सभी 9 याचिकाओं को खारिज कर ये डायरेक्शन दिया…

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शैलेन्द्र पाण्डेय / संपादक / मोबाइल नंबर : 7000256145
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