
बिलासपुर/ आखिर अपना बिलासपुर भी जलभराव के मामले में महानगर बन गया, शहर के मुख्यमार्गों, गलियों आए लेकर शहरसीमा से लगे हाइवे से ऐसी-ऐसी तस्वीरें आई कि लोग शोषल मीडिया में फोटो- वीडियो देखते रह गए।
गुरुवार शाम से शुरू हुई मूसलाधार बारिश ने निगम प्रशासन के निर्माण और नाले नालियों के सफाई के दावों की पोल खोलकर दी। अपर्याप्त गहराई और चौड़ाई व निर्माणगत खामियों के कारण करोड़ो के नाले- नालियो को छोड़ पानी की धार सैलाब की तरह हाइवे, शहर की सड़कों और गलियों में बहती दिखी। कही कमर भर तो कही सीने तक पानी दिखा। घरों और दुकानों में पानी भरने से लोग बेबस और जनजीवन अस्त व्यस्त दिखा। शहर भर से और शहर सीमा से लगे हाइवे से ख़ौफ़नाफ़ और नाव चलने की तस्वीरों ने नेताओं के विकास के दावों को सोचने पर मजबूर कर दिया…

चर्चा इस बात की रही कि ऐसा प्रशासन किस काम का जो गर्मी में पीने का पानी न दिला सके और बारिश में जलभराव से निजात न दिला सके…
अब क्या होगा
आमतौर बार बाढ़- बारिश के बाद जनस्वास्थ्य पर असर पड़ता है, मौसमी और जलजनित बीमारियों का संकर।न होता है, हेल्थ डिपार्टमेंट ने भी इसको लेमर चिंता जताई है पर शहर के खुले प्लाटों और खचवा- डबरा(गड्ढो)में पानी भरा है उसका क्या, यदि समय रहते खाली प्लाटों और गड्ढो में भरे बारिश के पानी के निकासी की व्यवस्था नही बनाई गई तो ठहरे पानी से डेंगू- मलेरिया का खतरा बढ़ सकता है।
क्योकि नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग खुद जनहित में अपील करते है कि ठहरे पानी मे मच्छरों के लार्वा पनपते है डेंगू मलेरिया के संक्रमण का खतरा रहता है इसलिए अपने आसपास जलजमाव न होने दे यहां तो पूरे शहर में पानी भरा है।
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