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खाद्य सुरक्षा विभाग,,, छापेमारी मा आघू,,, रिपोर्ट का अतापता नहीं, संकट भरोसे का का खाये न खाए…?

0 102 नमूने लिए रिपोर्ट सिर्फ 2 की वो भी ओके

0 फ़ूड सेफ्टी विभाग की विश्वसनीयता पर लगा प्रश्न चिन्ह

बिलासपुर/ खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच का रिपोर्ट कार्ड दिलचस्प तस्वीर पेश कर रहा है। जिले में जनवरी से लेमर जून 2026 तक कुल 102 खाद्य नमूने जांच के लिए लेकर भेजे गए, लेकिन इनमें से करीब आधे की रिपोर्ट अभी तक नहीं पहुंची है। यानी जिस खाने की शुद्धता जानने के लिए सैंपल लिए गए थे, उसकी सच्चाई अब भी लैब और कागजो में है।
सभी नमूनों को रायपुर के राज्य प्रयोगशाला भेजा जाता है, जहां पूरे प्रदेश से आए सैंपलों की जांच होती है। हाल ही में व्यापार विहार क्षेत्र से भी कई नमूने लिए गए, जिनमें चायपत्ती और गर्म मसाले जैसे उत्पाद शामिल हैं। कुछ नमूने अप्रैल महीने में लिए गए थे, जिनकी रिपोर्ट का इंतजार अब भी जारी है।
अब तक आई रिपोर्ट में रिंग रोड-2 स्थित रेवेन्स रेस्टोरेंट का पनीर और विशाल मेगा मार्ट की अरहर दाल गुणवत्ता जांच में फेल पाए गए हैं। बाकी जिन नमूनों की रिपोर्ट आई है, वे मानकों पर खरे उतरे हैं।
विभाग के मुताबिक यदि कोई नमूना फेल होता है तो संबंधित कारोबारी को केंद्रीय प्रयोगशाला हैदराबाद लैब में दोबारा जांच (अपील)
का एक मौका मिलता है। यह जांच गाजियाबाद या कोलकाता स्थित केंद्रीय लैब में होती है। वहां भी नमूना फेल होने पर संबंधित प्रकरण न्यायालय भेजा जाता है जहां एडीएम या सीजेएम कोर्ट में सुनवाई होती है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब रिपोर्ट आने में महीनों लग रहे हैं, तब तक उपभोक्ता जिस खाद्य सामग्री का सेवन कर रहे हैं, उसकी गुणवत्ता का फैसला आखिर होगा कब क्योकि दो नमूने तो फेल हुए हैं, लेकिन आधे से ज्यादा नमूनों की किस्मत अभी भी लैब की रिपोर्ट पर टिकी हुई है।

नही होता खराब

बताया जा रहा कि खाद्य साम्रगी के लिए गए सेम्पल का ज्यादा दिनों में खराब होने का सवाल ही नही है, क्योकि लिए गए नमूनों को फॉर्मेलिन मिलाकर रखा जाता है जिससे खाद्य सामग्री का सेम्पल लंबे समय तक खराब नही होता।

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शैलेन्द्र पाण्डेय / संपादक / मोबाइल नंबर : 7000256145
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