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तो क्या मुक़री है सब के सब…? मामला गोड़पारा नदी तट पर आवासीय की अनुमति पर कामर्सियल निर्माण का,,, निगम- अरपा साडा- T&CP सब मुक़री की तर्ज पर रहे नकार…

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0 3 दुकानें ही नही पूरा परिसर ही कामर्सियल है…

0 तनखैया ऐसे लगा रहे प्रशासन को वाट…

0 फिर उठे सवाल क्या देख रहे जिम्मेदार या नही सम्हल रहा विभाग

0 हाईकोर्ट में 900 से ज्यादा अवैध निर्माणों का दे चुके है हवाला

बिलासपुर/ ये प्रशासन चल रहा या मज़ाक अब न्यायधानी के आवासीय एरिया गोड़पारा नदी किनारे मेनरोड पर आवासीय नक्शे की स्वीकृति पर 3 मंजिला व्यवसायिक काम्प्लेक्स तनने का मामला चर्चा में है । नगर निगम प्रशासन – अरपा साडा ,तो अरपा साडा – टीएनसी (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग) को जिम्मेदार बता चप्पू चला रहे।

स्वीकृत नक्शा


जब ये हालात देश के केंद्रीय आवास एवं शहरी राज्य मंत्री और प्रदेश के उपमुख्यमंत्री व नगरीय प्रशासन मंत्री के संभागीय मुख्यालय का है तो प्रदेश के अन्य जिलों का क्या हाल होगा इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। नगर निगम के सभापति निगम आयुक्त सब हमेशा की तरह जांच करा कार्रवाई का दावा कर रहे पर क्या जांच होगी क्या कार्रवाई होगी ये तो आने वाला समय बताएगा। क्योकि ऐसे एक दो नही सैकड़ो मामले है 9 सौ प्रकरणों का हवाला तो निगम प्रशासन हाईकोर्ट को दे ही चुका है। पूरा मामला गोंड्‌पारा अरपा तट से लगे आर्य समाज भवन के ठीक बगल के निर्माणाधीन राज मैनुफैक्चरिंग एंड प्रोजेक्ट प्रालि. के जी प्लस थ्री नए बिल्डिंग का है।

बताया जा रहा कि इस भवन के निर्माण की स्वीकृति बतौर आवासीय कम्पनी के डायरेक्टर नीलेश जोबनपुत्रा के नाम से दी गई है।भवन निर्माणकर्ता ने सामने की ओर दुकानें निकालकर कमर्शियल निर्माण कराया जा रहा है।

ये है मामला

ग्राम गोड़पारा के नजूल शीट नंबर 47 और प्लॉट नंबर 59/2 में रकबा 3705 वर्गफीट जमीन पर गत दिसंबर 2023 के आवेदन पर भवन निर्माता श्री जोबनपुत्रा को आवासीय भवन के निर्माण की अनुमति दी गई थी।
स्वीकृत नक्शे के मुताबिक भूतल, प्रथम, द्वितीय और तृतीय तल पर आवासीय निर्माण का उल्लेख है।
सवाल यह उठ रहा कि ये खेल हो किसकी सरपरस्ती में और किसके दम पर खेला जा रहा कौन नक्शे के विपरीत दुकानों के निर्माण को प्रश्रय दे रहा।
8- 8 जोन है, 8 भवन शाखा अधिकारी है, उनके अंदर में इतना बड़ा स्टाफ है टाइमकीपर है तो ये देख क्या रहे, क्या निगम प्रशासन के पास ऐसा कोई नियम कानून नही जो अवैध निर्माण को सख्ती से रोकने में कारगर हो ताकि शहर का व्यवस्थित विकास हो सके।

अधिकारिता की स्वीकार्यता, कार्रवाई का दावा

निगम कमिश्नर मीडिया को बयांन दे रहे कि यदि स्वीकृत नक्शे और तय मापदंड के हिसाब से निर्माण नहीं हो रहा है तो निगम प्रशासन को कार्रवाई का अधिकार है। उन्होंने जांच कर कार्रवाई का दावा किया।

सभापति ने कहा कोई माई बाप नही

गोंड़पारा में जिस जगह यह निर्माण हो रहा है, वह नगर निगम के सभापति विनोद सोनी का वार्ड है, सभापति ने कहा कि ऐसा लग रहा निगम का कोई माईबाप नही है, निगम प्रशासन की कोई बख्त ही नही है जो जैसा पा रहा जहा पा रहा निर्माण करा लें रहा, गोड़पारा का मामला आवासीय नक्शे की स्वीकृति पर व्यवसायिक निर्माण का है जो बेहद गलत है। कार्रवाई होनी चाहिए पर करेगा कौन निगम के अफसर कह रहे कि अधिकार है जांच करा कार्रवाई करेंगे, बिल्कुल गलत है कार्रवाई होनी चाहिए।
पर सवाल यह उठ रहा कि भवन शाखा अधिकारी, टाइम कीपर और इतना बड़ा अमला आखिर कर क्या रहा, देख क्या रहा,,,? जब अवैध भवन तन जाता है तभी जिम्मेदार क्यो कांव- कांव करते है, तब क्यो नही जागते जब बन रहा होता है या ये भी मिलजुलकर तय षड्यंत्र के तहत आम नागरिकों को भोंदूराम बना रहे….?

इसको कहते है सिस्टम का दही

नगर निगम का सारा काम ऐसा ही है आप कुछ भी पूछिये या कोई डाटा मांगिये बताया जाएगा ये ज़ोन कार्यालयों से मिलेगा। किसी निर्माण के बारे में निगम में पूछेंगे तो अरपा विकास प्राधिकरण, अरपा विकास में पूछने पर tnc बताया जाएगा कुल मिलाकर किसी के पास कोई जवाब नही है।

निगम फेल ग्रीन नेट पास

हैप्पी स्ट्रीट में नगर निगम प्रशासन ने 10 गुमटियां लगवाई इन्हें कोई नही पूछ रहा 2-4 खुले वो भी बन्द हो गए, वही हैप्पी स्ट्रीट के ठीक सामने लोगो ने ग्रीन नेट तानकर दुकानें तान दी और 10 से 45 हजार मासिक किराए पर चढ़ा दिया ऐसा नही है कि ऐसा सिर्फ हैप्पी स्ट्रीट में हो रहा नूतन चौक, राजकिशोर नगर चौक, सिटी कोतवाली मल्टीलेवल काम्प्लेक्स के दुकानों का कोई लेवल नही है सब वीरान और खंडहर होते पड़े है कई बार टेंडर किया जा चुका। ऐसा क्यो हो रहा लोगो मे निगम प्रशासन के खिलाफ इतना अविश्वास क्यो…? लोगो का विश्वास जितने के लिए कोई पहल क्यो नही की जा रही ये समझ से परे है…क्योकि यदि इसका निदान हो और बिक्री हो या किराए पर उठे तो कम से कम निगम की आय बढ़े पर इसमें पता नही क्यो जिम्मेदारों को कोई रूचि ही नही है…?

इतना बेबस है निगम प्रशासन…?

बीच गोलबाजार के अवैध काम्प्लेक्स और वैशाली नगर के स्वीकृति के विपरीत निर्माण में जब गला फंसा तो बेबस नगर निगम ने हाईकोर्ट में एफिडेविड दे जानकारी दी कि शहर के विभिन्न वार्डो में 900 से अधिक अवैध निर्माण हुए है। कुल मिलाकर निगम प्रशासन की कोई अहमियत ही नही रह गई है जिसको जहा जैसा मन पड़ रहा वैसा ग्रीन नेट डालकर निर्माण करा लें रहा।

और देख तमाशा नटवर का…


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गोड़पारा नदी तट से लगे निर्माणाधीन के इस निर्माण की अनुमति नगर निगम के भवन शाखा से नही अरपा विकास प्राधिकरण से दी गई है।


अनुपम तिवारी
भवन शाखा अधिकारी नगर निगम

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गोड़पारा नदी तट से लगे इस भवन के निर्माण की अनुमति
अरपा विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण से नही बल्कि टा उन ऐंड कंट्री प्लानिग विभाग द्वारा दी गई है।

प्रतीक शर्मा

अरपा विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण

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गोड़पारा के नजूल शीट नम्बर 47 प्लाट नम्बर 59/2 रकबा 3705 वर्गफीट पर आवासीय निर्माण के लिए अनुमति टीएनसी से नही बल्कि अरपा विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण से दी गई है।

भानू प्रताप सिंह पटेल
संयुक्त संचालक (प्रभारी) / उप संचालक बिलासपुर

विनोद सोनी, सभापति नगर निगम बिलासपुर

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