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*न्यायधानी में कृपा बरसाए रखना जैसे हालात…! गलियों से लेकर मेन मार्केट तक बारूद का खुला कारोबार, टनों अवैध पटाखों से भरे पड़े दुकान, गोदाम, पूछ रहे बिलासपुरियन्स फ़ूड सेफ्टी के कार्रवाई म आगू ,,, तो अवैध पटाखा कारोबार पर क्यो भोथरी धार, फायर ब्रिगेड का हाल भी जगजहिर*

0 इस बार भी शिकायतों की पोंगली और हवा हवाई

0 5 दमकल, 5 फटाखा बाज़ार और गलियों से लेकर व्यस्ततम बाज़ार तक सैकड़ो गोदाम- दुकान

बिलासपुर/ न्यायधानी में आमजनमानस की जान से किस तरह खुला खिलवाड़ चल रहा ये किसी से छिपा नही है। शहर के रिहायशी गली मोहल्लों से लेकर व्यस्ततम बाजारों तक न सिर्फ खुलेआम पटाखों का अवैध कारोबार चल रहा, बल्कि गोदाम और दुकानों में टनों पटाखे भंडारण कर रखे गए है।

शहर में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी। 5 जगहों सकरी, अरपातट गोड़पारा रिवर व्यू, तिफरा, सिरगिट्टी और तोरवा थाने के सामने पटाखों का बाजार लगा है, इसके अलावा शनिचरी और बृहस्पति, बुधवारी, मध्नगरी, सरजू बगीचा मसानगंज, तेलीपारा, जूनीलाइन, चाँटीडीह, दयालबंद, तोरवा, मोपका चौक, राजकिशोर नगर चौक, मोपका चौक, जूना बिलासपुर, गांधी चौक, मुंगेली नाका, कुदुदंड समेत शहर के अन्य इलाकों में न सिर्फ खुलेआम अवैध रूप से पटाखों के शो रूम सजे है बल्कि इनके गोदाम भी टनों पटाखों से भरे है। हर वर्ष की तरह इस बार भी जांच और कार्रवाई का हवा हवाई दावा कर परम्परा का निर्वहन किया गया।*तुतारी भी इन्ही को*

प्रशासनिक अमला इन अवैध दुकानों और गोदामो में कार्रवाई की हिम्मत नही जुटा पाते, या नजराना, शुक्राना निभाते है इसको लेकर भी चर्चाएं आम है,,, प्रशासन के नियम कायदों का पालन कर बकायदा शुल्क अदा कर कारोबार करने वाले पटाखा बाज़ार के कारोबारियो को इस बात की बेहद तकलीफ है कि सारे नियम कायदों का पालन करने और शुल्क अदा करने के बाद तुतारी भी केवल उन्हीं लोगों को किया जाता है, अवैध कारोबारियो और भण्डारियो का तो कोई रोंआ भी टेढ़ा नही कर सकता, हर बार की तरह उन्होंने इस बार भी शहर भर में अवैध कारोबार और भंडारण करने वालो की लिखित शिकायत कर दी है,,, अब जिम्मेदार परम्परा निभाएंगे या कुछ करेंगे भी ये भी सारा शहर देखेगा…?

और ये है फायर ब्रिगेड का हाल

फायर ब्रिगेड में 6 फायर बिग्रेड और 110 के सेटअप पर महज 39 फायर स्टाफ कार्यरत है। थोड़े भय
त नही 71 स्टाफ की कमी है, जो हैं वे भी न तो प्रशिक्षित है न परमानेंट। उम्मीद थी कि नगर निगम से नगर सेना में जाने के बाद सिस्टम में सुधार होगा पर हो उम्मीद विपरीत रहा ।

ये है मापदंड

तय मापदंड के मुताबिक प्रत्येक 50 हजार की आबादी पर कम से कम 1 दमकल वाहन होने चाहिए। शहर की 5 से 7 लाख की आबादी के लिए महज 5 दमकल है।
जबकि बिलासपुर में 12 से 13 दमकल होने चाहिए पर है टोटल 6 उनमें से 1 हाईकोर्ट में तैनात है।

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