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कोटा थाने में रसूखदारों का हाई-वोल्टेज ड्रामा, पुरानी रंजिश से भड़की हिंसा, पुलिस बनी मूकदर्शक, थाने के भीतर गाली-गलौज और मारपीट CCTV में कैद, FIR पर सस्पेंस कायम..


बिलासपुर,,,, प्रदेश की न्यायधानी बिलासपुर के कोटा थाने का एक वीडियो सामने आने के बाद से मामला इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। थाने के अंदर क्षेत्र के नामचीन लोगों द्वारा उत्पात करने की घटना का सीसीटीवी थाने में लगे कैमरे में भी कैद हो चुका है। सूत्रों का दावा है कि क्षेत्र के रसूखदारों ने थाने के अंदर जमकर गाली गलौज करते हुए मारपीट भी की है। रसूखदारों के थाने के अंदर उत्पात मचाने के बाद भी थाने में मौजूद पुलिसकर्मी उनके खिलाफ कार्यवाही करने की बजाय कैमरे में कैद होने की बात कहता नजर भी आ रहे है। वायरल वीडियो मे एक पुलिसकर्मी अपने मोबाइल से पूरे नजारे को कैद करता हुआ भी नजर आ रहा है तो कुछ खाकीधारी उत्पाती लोगो को कैमरे के सामने हंगामा नहीं करने की नसीहत देकर अपनी ड्यूटी करते नजर आ रहे है।

सूत्रों की माने तो कोटा तहसील क्षेत्र में बेजा कब्जा हटाने की कार्रवाई के दौरान उपजे पुराने विवाद ने एक बार फिर हिंसक रूप ले लिया। जानकारी के अनुसार, तहसीलदार प्रांजल मिश्रा के नेतृत्व में बेजा कब्जा तोड़े जाने के समय राम सोनी और संतोष मिश्रा उर्फ छोटे महराज (पिता लल्लन महराज) के बीच विवाद हुआ था। इसी पुरानी रंजिश को लेकर दोनों पक्षों के बीच जमकर मारपीट हुई ।

विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एक पक्ष के नामचीन ने इस दौरान घर से तलवार निकाल कर प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विवाद बढ़ने पर राम सोनी पर हमला कर दिया। बचाव के दौरान राम सोनी का हाथ गंभीर रूप से घायल हो गया, जिस पर सात टांके लगे हैं। मामला कोटा थाना पहुंचा, जहां घटना की सूचना मिलने पर भाजपा नेता विकास सिंह भी मौके पर पहुंचे। आरोप है कि थाने के अंदर पुलिस वालो के सामने ही गाली-गलौज और मारपीट शुरू हो गई,। यह पूरी घटना थाने में लगे CCTV कैमरों में कैद हो गई है। बताया जा रहा है कि इस दौरान भानु मिश्रा के साथ भी मारपीट हुई।



मामला संवेदनशील होने और दोनों पक्षों के सत्ता व विपक्ष से जुड़े होने के कारण समझौते की चर्चा सामने आ रही है। कोटा पुलिस के अनुसार, फिलहाल इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।

और ना ही सीसीटीवी में किसी प्रकार की तलवार से हमले की पुष्टि हो पाई है। अब देखना होगा कि थाने के अंदर हुए इस उत्पात के बाद पुलिस विभाग के उच्च अधिकारी क्या संज्ञान लेते है और पूरे मामले में कब तक मामला दर्ज हो पाता है।

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Santosh Shriwas
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