
बिलासपुर । कब होही तोर दर्शन मैय्या कब होही तोर … ये धुन ये माहौल…और ये तस्वीरें वाकई चौकाने वाली है, जहां महिलाएं दिन में जाने से भयभीत होती थी और आज भी जाने से कतराती है उसी सरकंडा पंडित देवकीनन्दन दीक्षित मुक्तिधाम में नवरात्र पर्व की धूम मची है, माताएं बहने बेधड़क धधककती चिताओं के बीच श्मशानवासिनी जगतजननी माँ कालरात्रि के दर्शन और पूजन करने पहुच रही। मा महिषासुर मर्दिनी माता कालरात्रि के यहॉ प्राकट्य की जो कहानी बताई जा रही वो भी कम अद्भुत नही है…
मुक्तिधाम के कालरात्रि माता दरबार मे सुबह से अर्धरात्रि तक पुरुष, महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग सब दर्शन के लिए पहुँच रहे, माता के दरबार मे पूजन कर मत्था टेक अपने परिवार के सुख समृद्धि की कामना कर रहे।



ये है कालरात्रि माता के प्राकट्य की कहानी
आज से करीब 40-45 साल पहले वीरान सरकण्डा मुक्तिधाम में निगम कर्मी चौकीदार सुखदेव शेंडे की कुटिया थी, जहा वे हर नवरात्र पर अपनी पत्नी और
पुत्र कमल राव शेंडे के साथ जो अब उनकी जगह श्मशान की चौकीदारी करते है, माता की प्रतिमा स्थापित कर जोत जवारा कर पूजा अर्चना करते थे, कमल और मंदिर के वरिष्ठ पुजारी करीब 70-72 वर्षीय सीताराम तिवारी ने बताया कि सुखदेव बाबा झाड़ फूंक भी करते थे उनकी प्रसिद्धि थी, किसी ने उनका नाम जबलपुर के एक परिवार को बताया जिनकी 10-12 साल की बिटिया को प्रेत बाधा थी। ये परिवार बच्ची को फूंक झाड़ कराने बिलासपुर सरकण्डा मुक्तिधाम लेकर पहुँचा, शेंडे परिवार ने उनका आथित्य किया बाबा ने झाड़फूंक किया, बच्ची के अंदर की आत्मा ने यही बाबा के साथ रहने जिद की, बाबा ने समझाया कि माताजी यहाँ मेरा परिवार है आप यहाँ कहा रह पाएंगी आइए मैं आपको जगह दिखाता हूँ, बाल कन्या के अंदर की आत्मा ने बाबाजी के साथ पूरे श्मशान की परिक्रमा की उसके बाद एक कोने के अकोल पेड़ के नीचे बैठ गई कि अब मैं यही वास करूंगी।
इसके बाद 3 रे दिन बच्ची एकदम ठीक हो गई और परिवार अपनी बच्ची को लेकर वापस लौट गया। इस अद्भुत घटनाक्रम के बाद बाबा ने जिस पेड़ के नीचे बच्ची के शरीर से प्रेतआत्मा निकली थी, उसी पेड़ के नीचे माता का चबूतरा बनाने नींव की खुदाई कराई इसी दौरान जमीन से माँ कालरात्रि की प्रतिमा प्रकट हुई, तब से यहां माता श्मशानवासिनी कालरात्रि विराजमान है। यहाँ रोज आठो काल बारहों माह सुबह- शाम माँ कालरात्रि की पूजा होती आ रही है…नवरात्र में हर साल विशेष आयोजन होता है, भक्त दूर – दूर से यहाँ श्मशानवासी भगवान भोलेनाथ और माता श्मशान वासिनी कालरात्रि के दर्शन करने पहुच रहे, मंदिर के मुख्यपूजारी बाबा सीताराम का कहना है कि माँ कालरात्रि यहाँ दरबार मे मत्था टेकने वालो की सारी मनोकामनाएं पूरी करती है सबकी झोली भरती है यही वजह है कि श्रद्धालु माता के दरबार मे दूर- दूर से मत्था टेकने पहुँचते है…।
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