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ट्रिपल इंजन की सरकार और डबल प्रभार का एक और …महाघोटाला, मामला तुम्ही हो क्रेता – विक्रेता तुम्ही हो की तर्ज पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को बांटी गई 10 करोड़ की गुणवत्ताविहीन घटिया साड़ियों का

  झेंझहरा और छोटी साड़ी बांटने को लेकर महिलाओ में आक्रोश

0 नेताओ के पिछलग्गू सप्लायरों और ठेकेदारों ने फिर मचा दी सरकार की फजीहत

0 महतारी वंदन और महतरियो को 33 फीसदी आरक्षण का दावा साड़ियों में छलावा

बिलासपुर । ट्रिपल इंजन की सरकार के डबल प्रभार वाले अफसर के बावजूद छत्तीसगढ़ के महिला एवं बाल विकास विभाग का फिर एक बड़ा महाघोटाला सामने आया है।
वो भी 10 करोड़ का… मामला
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को वितरित की गई घटिया और अमानक साड़ियों का है। मामले को ठंडा करने के लिए जांच वाले भभूत का छिड़काव कर हाथ- पैर बचाने जोर आजमाइश की जा रही है।
बताया जा रहा कि नेताओ के पिछलग्गू ठेकेदारों और सप्लायरों ने यह करिश्माई महाघोटाला खादी एवं ग्रामोधोग विभाग और महिला एवं बालविकास विभाग में सांठगांठ कर किया इन दोनों विभाग का प्रभार 1 ही आईएएस अफसर के पास है।

मामला तब खलबलाया जब यूनिफॉर्म के नाम पर
प्रदेश के 1.94 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को बांटी गई 500-500 रुपये की साड़ियों
की लंबाई 5.5 मीटर से सिकुड़कर 5 मीटर रह गई और गुणवत्ता पर बवाल मचा, और विभाग ने फजीहत मचने के बाद सभी जिला एवं महिला बाल अधिकारियों को कार्यकर्ताओ और सहायिकाओं से साड़ियां वापस मंगाने का फरमान जारी कर दिया,
इस योजना में करीब 10 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप हैं, फजीहत को देखते हुए हर बार की तरह जांच का बयान देकर मामले को ठंडा करने का प्रयास किया जा रहा क्योकि जबको पता है कि इस तरह के घोटालों के जनक की रिपोर्ट कभी आती ही नही है, क्योकि हमाम में सब… है।

पहली ही धुलाई में उतरने लगा रंग

खुद खरीदे,,, खुदई बेचे

बताया जा रहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग और खादी ग्रामोधोग का प्रभार एक ही आईएएस अफसर के पास है, यानि बेचने वाले भी वही और खरीदने वाले भी… फिर क्या नियम क्या कायदा फायदा ही फायदा वाला हिसाब है…।
बताया जा रहा कि करोड़ो का ये काम बलरामपुर के सप्लायर और धमतरी के पूर्व कांग्रेस विधायक के रिश्तेदार को दिया गया था।

झोलझाल है भई सब झोलझाल है

बाजार में 65 स्र्पए से लेकर हजारों रुपये तक कि साड़ियां है, मध्यमवर्गीय परिवार की महिलाएं 500-500 की साड़ियाँ घर बाहर सब पहनती है, अब आप समझ गए होंगे कि इन घटिया गुणवत्ताविहीन साड़ियों की कीमत होगी कितनी, जिनकी कीमत खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड अब भी जीएसटी सहित 718 रुपये से 860 रुपये बता रही है। सबको पता है कि 4000 – 5000 की खरीदी पर ग्राहकों को कोल्डड्रिंक्स और कॉफी सर्व किया जाता और डिस्काउंट व गिफ्ट दिया जाता है सो अलग यहां तो सरकार के 10 करोड़ का मामला है, सरकारी सप्लाई होती कैसी है ये भी जगजाहिर है।
ये मामला 33 फीसदी आरक्षण की हकदार नारी शक्ति को धोखा देने उनके साथ छल करने का है, ये ढोटाला उन महतरियो के साथ है जिनके वंदन का ढिंढोरा पीटा जा रहा, जिनके बाल पर सरकार बनी है, ये सरकार की फजीहत का सवाल है, अब ये तो समय बताएगा कि कुछ होगा या फिर जिम्मेदारों को बतौर इनाम प्रमोशन दे दिया जायेगा जैसा लगातार होते आ रहा।

सुरेश सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बालविकास विभाग

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शैलेन्द्र पाण्डेय / संपादक / मोबाइल नंबर : 7000256145
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