ब्रेकिंग

77 लाख के एफडीआर कांड का बन गया फतका, जब एक्सपायर्ड Fdr की जगह नया जमा कराया तो पेनाल्टी और आरबीआई को चिट्ठी क्यो

0नेतागिरी के चक्कर मे और फतकता जा रहा मामल

बिलासपुर। स्मार्ट सिटी लिमिटेड के 77 लाख रुपये के एफडीआर कांड का फतका बन गया है। सवाल यह उठ रहा कि जब जांच में एक्सपायर्ड एफडीआर को हटाकर उसकी जगह नया एफडीआर जमा कराया गया है। तो ऐसे ईमानदार और बपुरे ठेकेदार पर 16 लाख की पेनाल्टी और आरबीआई को चिट्ठी क्यो।
केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू और नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव स्मार्ट सिटी के फंड में गफलत के आरोपो की जांच कराने की बात कह चुके है, इसके बावजूद 77 लाख के एफडीआर कांड का मुद्दा इन दिनों चर्चा में है। स्मार्ट सिटी के अफसर और कर्मचारी फिर सन्देह के दायरे में है मिली भगत के आरोप लग रहे।

ये है मामला

दरअसल मामला स्‍मार्ट सिटी फंड से नाला निर्माण का है। टेंडर निकाला गया जिस चर्चित ठेकेदार ने कम रेट पर टेंडर जमा किया। नियम के तहत उस ठेकेदार से 77 लाख का एफडीआर जमा कराया गया ताकि, टेंडर की शर्तों के अनुरूप निर्माण हो और काम पूरा हो। बताया जा रहा कि ठेकेदार ने काम पूरा ही नहीं किया और अधिकारियों से मिलकर टेंडर वापस ले काम ही छोड़ दिया वो भी मौखिक तौर पर।जब इसी काम का रिटेंडर करने कवायद शुरू की गई तो पता चला कि ओरिजनल एफडीआर ही गायब है उसकी जगह हूबहू ऐसा ही दस्तावेज फाइल में लगाया गया है । मिलीभगत कर एफडीआर को भुनाने के भी आरोप लगे।मामला उजागर होने के बादटीम गठित कर इसकी जांच भी कराई गई। अब बताया जा रहा कि एफडीआर गायब नही हुआ बल्कि एक्सपायर होने के कारण उसे हटाकर नया एफडीआर जमा किया था।

भला ये कौन सा अपराध है फिर इस मामले में उस चर्चित व ईमानदार ठेकेदार पर 16 लाख की पेनाल्टी क्यो। फिर क्यो संबन्धित बैंक से निगम और स्मार्ट सिटी के सभी बैंक खातों को बन्द कर उक्त बैंक के खिलाफ आरबीआई को पत्र भेजा गया ये बात कुछ हजम नही हो रही।

फिर ये भी कमाल

अधिकारी अब ये भी बता रहे कि रोड में अतिक्रमण होने के वजह से प्रोजेक्ट के काम मे एक साल विलंब हुआ। तो सवाल यह उठ रहा कि जब साइट ही ओके नही थी तो तकनीकी स्वीकृति कैसे दे दी गई। अधिकारियों का कहना है कि आगे ऐसे कोई गड़बड़ी न हो इसके लिए अब एसओपी बनाया गया है।

पढ़ावत हे ददा पढ़ावत है दाई

पढ़ावत हे ददा पढ़ावत हे दाई टूरी निकल गए मनटोरा बाई, निगम के लेखा शाखा का हाल भी कुछ ऐसा ही है। लेखाधिकारी है, वित्ताधिकारी और ऊपर से 80 हजार मासिक के निजी सीए इसके बाद ऐसी गड़बड़ी सामने आ रही है। अभी तक तो ये तीनो ही निगम और स्मार्ट सिटी लिमिटेड का लेखाजोखा देख रहे थे। अभी हाल ही में तो स्मार्ट सिटी के दफ्तर को विकास भवन से तारबाहर के कमांड सेंटर बिल्डिंग में शिफ्ट किया गया है।

Author Profile

शैलेन्द्र पाण्डेय / संपादक / मोबाइल नंबर : 7000256145
शैलेन्द्र पाण्डेय / संपादक / मोबाइल नंबर : 7000256145
Latest entries