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पिता की चिता को बेटी ने दी अग्नि, बिलासपुर में बदली परंपरा की तस्वीर; 14 साल की कृपा बनी साहस की मिसाल, कछवाहा समाज ने नम आंखों से देखा बेटियों का सम्मान, संस्कार और जिम्मेदारी निभाने का भावुक दृश्य…

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बिलासपुर,,, तेलीपारा क्षेत्र से एक भावुक और प्रेरणादायक मामला सामने आया है! जहां 14 वर्षीय बेटी कृपा कछवाहा ने अपने पिता पिंटू कछवाहा को मुखाग्नि देकर समाज के सामने साहस, संस्कार और जिम्मेदारी की मिसाल पेश की… बताया जा रहा है! कि कछवाहा समाज में यह पहला अवसर है! जब किसी बेटी ने पिता का अंतिम संस्कार किया है!

जानकारी के अनुसार, तेलीपारा निवासी पिंटू कछवाहा पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे…! मंगलवार रात उनकी तबीयत अचानक ज्यादा बिगड़ गई…. जिसके बाद परिजन उन्हें इलाज के लिए रायपुर लेकर गए… जहां डॉक्टरों ने काफी प्रयास किए…

लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका… देर रात करीब तीन बजे उनका पार्थिव शरीर बिलासपुर स्थित तेलीपारा निवास लाया गया… परिवार में पत्नी और एक 14 वर्षीय बेटी कृपा ही हैं! बेटा नहीं होने के कारण परिवार और समाज के लोगों ने बेटी से अंतिम संस्कार कराने का निर्णय लिया…


पिता के निधन से टूट चुकी कृपा ने खुद को संभालते हुए अंतिम यात्रा में हिस्सा लिया… और मुक्तिधाम पहुंचकर नम आंखों से पिता को मुखाग्नि दी…

इस दृश्य को देखकर वहां मौजूद लोग भावुक हो गए… समाज के वरिष्ठ लोगों ने बेटी के इस साहसिक कदम की सराहना करते हुए…. इसे बदलती सामाजिक सोच और बेटियों की बढ़ती भूमिका का प्रतीक बताया…


परिजनों का कहना है! कि दुख की इस घड़ी में कृपा का साहस पूरे परिवार के लिए संबल बन गया… वहीं सामाजिक संगठनों ने भी इस घटना को प्रेरणादायक बताते हुए कहा… कि बेटियां अब हर जिम्मेदारी निभाने में सक्षम हैं! बिलासपुर की यह घटना समाज को यह संदेश देती है!

कि अंतिम संस्कार केवल परंपरा नहीं, बल्कि प्रेम, सम्मान और कर्तव्य का प्रतीक है! जिसे बेटा और बेटी दोनों समान रूप से निभा सकते हैं!

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