
0 टेक्नीशियन न होने के कारण ठप पड़ी सोनोग्रफी मशीन

*0 लैब है पर किट और स्टाफ का टोंटा, निजी संस्थानों में भेजे जा रहे मरीज

बिलासपुर / आयुर्वेद के प्रति आमजन में रुझान बढ़ा, भीड़ बढ़ी तो शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय चिकित्सालय की व्यवस्था भी फोकला फांसी हो गया। यहाँ भी दवाइयों और चिकित्सा संसाधनों का टोटा है। डॉक्टर की लिखी पर्ची की एकाध दवाई दवा काउंटर में मिल गई तो बहुत है, बाकी की दवाइयों के लिए सामने आधा दर्जन मेडिकल स्टोर्स खुल गए है, चिकित्सा के नाम पर खुल्ला धंधा का माहौल है।



संभागीय मुख्यालय में मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, आधा दर्जन से अधिक शहरी स्वास्थ्य केंद्र और शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय चिकित्सालय के बाद भी अंचलवासी चिकित्सा के नाम पर खून के आंसू रोने विवश है। सीजीडीएनए ने सरकारी एलोपैथी हॉस्पिटल के हालात से जनसामान्य और जिम्मेदारों को अवगत कराने के बाद शनिवार को सरकंडा नूतन कालोनी के शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय चिकित्सालय के हालात का जायजा लिया तो यहाँ को बदहाली भी खुलकर सामने आ गई।
70 परसेंट दवाइयां गायब, खुल गए आधा दर्जन औषधालय
सीजीडीएनए की टीम ने दवा काउंटर के हालात का जायजा लिया, तो डॉक्टर की पर्ची लेकर दवा काउंटर पहुँचे मरीज और उनके परिजनों को बताया गया कि 5 में से 2 दवाइयां उपलब्ध है 3 बाहर से ले लीजिए तो किसी को एक ही दवा देकर बाकी बाहर से खरीदने कहा गया।
जिपर नही रद्दी पेपर में लपेट के दी जा रही दवाईयां

अस्पताल के दवा काउंटर से ज्यादातर दवाइयां गायब और स्टोर्स क रेख खाली है, नतीजतन मरीजो को आधी से ज्यादा दवाईयां सामने खुले मेडिकल स्टोर्स से खरीदनी पड़ रही है, मरीजो को अस्पताल से जिपर के बजाय पेपर में दवाइयां लपेटकर दी जा रही जिपर तक नही।
तपिश भरपूर कूलर ठप
एक तिहाई ग्रीष्मकाल निकल गया अभी तक कूलर चालू नही कराये गए ज्यादातर कूलर ठप पड़े है, स्टाफ, मरीज, परिजन, डॉक्टर, भावी डॉक्टर सब उमस भरी गर्मी में पसीना बहाने विवश है।
सोनोग्राफी भी प्राइवेट में
सरकार ने शासकीय आयुर्वेद चिकित्सा महाविद्यालय को बतौर झांकी सोनोग्राफी मशीन तो दे रखा है, पर इसे चलाने ऑपरेटर, टेक्नीशियन कोई नही है, नतीजतन मरीजो को सोनोग्रफी जांच के लिए बाहर स कराकर लाने कहा जा रहा है।
लैब है या लबार का अड्डा
शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय में लैब भी है, लेकिन किट, संसाधनों के टोटे के कारण यहां
अधिकांश जांच हो ही नही रहे, मरीजो को रक्त सम्बन्धी जांच के लिए लाखों का लैब होने के बाद भी परिजनों को अपने मरीजो को लेकर निजी संस्थानों में जांच कराने भटकना पड़ रहा।
बहुत नाम सुना तो लोरमी से आया, कुछ नही है अब दोबारा नही आऊंगा-
कोई जिम्मेदार नही
सीजीडीएनए की टीम ने चिकित्सा संसाधनों और दवाइयों के टोटे को लेकर प्रभारी डॉ नोविता दीवान व डॉ विवेक महलवार से सम्पर्क का प्रयास किया परन्तु दोनो से मुलाकात- चर्चा नही हो सकी।

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