
बिलासपुर/जिस छत्तीसगढ़ को अमीर धरती के गरीब लोग और टैक्स फ्री करने का दावा किया जा रहा था उसी छत्तीसगढ़ में सरकार को अब बच्चों की शिक्षा भारी पड़ रही। ये हम नही ये सरकारी फरमान कह रहा,,, जिसमे अब कांग्रेस शासनकाल की महती और सराहनीय मुफ्त शिक्षा स्वामी आत्मानंद स्कूलो में विद्यार्थियों से शुल्क लेने का उल्लेख है। हालांकि अभी ये आदेश केवल हिंदी मीडियम के लिए जारी करना बताया जा रहा है…
वो भी भारी मुसीबत के ऐंन संकटकालीन परिस्थितियों में, वो भी पहले भी कारपोरेट कम्पनी की तरह कम स्ट्रेंथ वाले स्कूलों को बन्द करने, केजी और यूजी बन्द करने और अगले साल भी बन्द करने की घोषणा के बाद।
डीजल- पेट्रोल, दूध से लेकर रोजमर्रा की सारी चींजे पहले ही महंगी हो चुकी है ऐसे में फीस की मार पालकों को पड़ने वाली है, ये वो तबका है जो सोने- चांदी के दाम की खबरों को देख कर ऐ ददा कहकर बैठ जा रहा है।

ये है आदेश …


तो फिर स्वामी आत्मानंद स्कूल का क्या मतलब
शासन के इस आदेश की खबर लगते ही लोगो के बीच चर्चा इस बात की है कि जब पैसा ही देना है तो फिर निजी स्कूल क्या बुरा था जहाँ से मजबूरीवश उन्होंने अपने बच्चों को यहां निशुल्क और अच्छी शिक्षा के लिए निकालकर स्वामी आत्मानन्द में भर्ती कराया है।
पहले कुछ नही लगता था,
इस सम्बंध में जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे को कॉल कर उनसे चर्चा का प्रयास किया ज्ञाबपर उन्होंने काल रिसीव ही नही किया, वही आत्मानन्द इंग्लिश मीडियम के एक शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त में बताया कि पहले कुछ नही लगता था,
स्वामी जी के नाम 751 स्कूल
तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने बच्चों को निजी के बजाय स्वामी आत्मानन्द सरकारी स्कूलों में पढ़ने के लिए प्रेरित करने इंग्लिश मीडियम शुरू करा अच्छी शिक्षा का वातावरण बना दावा किया, जो इस कदर हिट हुआँ कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार के लोग अपने बच्चों की टीसी निकालकर स्वामी आत्मानन्द ले आये।

बढ़ा स्ट्रेंथ बढ़ा क्रेज
जिन सरकारी स्कूलों में पहले विद्यार्थियों का टोंटा था वही स्वामी आत्मानन्द स्कूलो में विद्यार्थियों की रेलमपेल मच गई। मंत्रियों के अनुशंषा पत्र आने लगे लॉटरी निकालनी पड़ी जिसका जलवा आज तक बरकरार है।
10 मद अब बढोतरी का आदेश
बताया जा रहा कि स्वामी आत्मानन्द इंग्लिश मीडियम में 50 यानी 50 सीटों पर ही प्रवेश का नियम है, जबकि 10 वी के बाद सन्कायवार 20-25 की लिमिट है पर हिंदी मीडियम में कोई लिमिट ही नही फरमान है किसी को नही भगाना है सबको प्रवेश देना है। इसके तहत अभी केवल हिंदी मीडियम में 10 मदो में बढ़ोतरी का फरमान जारी किया गया है जबकि गुरुजी कह रहे काहे का बढ़ोतरी पहले तो कुछ लगता ही नही था।
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