
0 कहा अब कबाड़ से जुगाड़ नही कमाल” कहिए

0 स्वच्छता सर्वेक्षण 2026 के लिए कर रहे जी तोड़ प्रयास
बिलासपुर … स्वच्छता सर्वेक्षण 2026 के मद्देनजर नगर निगम के वेल्डर कलाकार प्रदीप विश्वकर्मा ने एक बार फिर अपनी हुनरमंदी और अनोखी कलाकारी से कबाड़ को खूबसूरत पहचान दी है। पुराने बेकार पड़े टायर, खाली डिब्बे और जेरिकेन अब उनकी कला के जरिए आकर्षक शोपीस और सजावटी आकृतियों में बदल गए।

प्रदीप ने पुराने टायरों से मिकी माउस, कमल फूल, फ्लावर पॉट, कुआं, गमले, कप और घड़ी समेत अन्य सजावटी कलाकृति तैयार की हैं, वहीं खाली डिब्बों से सूरजमुखी के खूबसूरत फूल बनाए गए हैं। इतना ही नहीं, 5 लीटर के जेरिकेन से प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश की प्रतिमा और आकृति तैयार कर पर्यावरण संरक्षण और “वेस्ट टू बेस्ट” का बड़ा संदेश देने की कोशिश की है।

उनकी सोच, हुनर और रचनात्मकता ने अनुपयोगी कबाड़ को शहर की सुंदरता बढ़ाने वाला आकर्षण बना दिया है। स्वच्छता सर्वेक्षण को देखते हुए शहर में रंग-रोगन, सफाई और सजावट के साथ-साथ कचरे को कला का रूप देने पुराने टायरों से आकर्षक घड़ी भी तैयार की जा रही है। इसके लिए टायरों की कटिंग, घिसाई और रंगाई कर अलग-अलग डिजाइन के शोपीस बनाए जा रहे हैं, जो लोगों का ध्यान खींच रहे हैं।

जून में होने वाले स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए इन कलाकृतियों को शहर के सभी 8 जोन कार्यालयों, गार्डनों और चौक-चौराहों पर रखवाया जा रहा, ताकि शहरवासियों के साथ- साथ दिल्ली से आने वाली टीम को यह संदेश दिया जा सके कि —
“कचरा सिर्फ फेंकने की चीज नहीं… हुनर हो तो वही कबाड़ पड़ा कचरा शहर की पहचान बन सकता है।”
नगर निगम वर्कशॉप में कार्यरत प्रदीप हर साल स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए अपनी परिकल्पना और अधिकारियों के मार्गदर्शन में कबाड़ को कुछ नया आकार देकर “वेस्ट टू बेस्ट” का संदेश देते हैं। उनका मानना है कि जिन टायरों और कबाड़ को लोग बेकार समझकर फेंक देते हैं, वही सही सोच और रचनात्मकता से शहर की खूबसूरती बढ़ाने का माध्यम बन सकते हैं।

निगम अधिकारियों का कहना है कि स्वच्छता सर्वेक्षण में केवल सफाई ही नहीं, बल्कि कचरे के बेहतर उपयोग को भी विशेष महत्व देने सन्देश है, ऐसे में प्रदीप की यह अनोखी कलाकारी बिलासपुर को अलग पहचान दिलाने में मददगार साबित हो सकती है। स्थानीय लोग भी इस पहल की जमकर सराहना कर रहे हैं।
गौरतलब है कि इससे पहले भी प्रदीप ने कोल्ड ड्रिंक की प्लास्टिक बोतलों और केन से छत्तीसगढ़, भारत और बिलासपुर के 70 वार्डों का नक्शा तैयार किया था। इसमें शहर के बीचोंबीच बहने वाली अंतःसलिला माँ अरपा मैया का भी बेहद आकर्षक चित्रण किया गया था।
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