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न्यायधानी के सेंट्रल जेल की चारदीवारी के अंदर पत्थर से हमला कर विचाराधीन बंदी की हत्या, बिन सजा-सजाए मौत, जिम्मेदार कौन…

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बिलासपुर/ न्यायधानी के सेंट्रल जेल की चाहरदीवारी के अंदर से एक सजा याफ्ता बंदी द्वारा एक विचाराधीन बंदी पर जानलेवा हमला और हमले से मौत की खबर आने में 24 घण्टे से अधिक समय लग गए। सवाल यह उठ रहा कि क्या अब जेल भी सुरक्षित नही रहा…

वारदात सोमवार सुबह करीब 9.32 बजे की बताई जा रही है, जेल अधीक्षक खोमेश मंडावी द्वारा मीडिया को दिये गए बयान की माने तो मुंगेली जिले के ग्राम चमारी का राजेश राय पिता हरिराम (40 साल) सन 2008 से ट्रिपल मर्डर के केस में सेंट्रल जेल में बन्द है। उसे जेल के E-1 बैरक में रखा गया है। उसी बैरक में पास्को एक्ट का आरोपी विचाराधीन कोटा निवासी नीलू जगत(25 साल) को भी रखा गया था। जेल अधीक्षक के मुताबिक सोमवार सुबह आजीवन कारावास का बंदी राजेश बैरक के बाहर नाली के होल पर रखे सीमेंट के ढक्कन को पैर से तोड़कर बैरक के अंदर लेकर गया और सीमेंट के ढक्कन से वहाँ लेटे विचाराधीन बंदी नीलू के सिर पर 3-4 बार जानलेवा हमला किया, चीख पुकार सुनकर दौड़े 10-12 बंदियों ने बीच बचाव कर दोनो को अलग किया।

बताया जा रहा कि इस जानलेवा हमले में घायल विचाराधीन बंदी को सिम्स में भर्ती कराया गया, जहाँ मंगलवार को विचाराधीन बंदी नीलू जगत की मौत हो गई।

जेल है कि …*

न्यायधानी बिलासपुर का सेंट्रल जेल लंबे समय से दबंग बंदियों और कुछ नामचीन सुरक्षा प्रहरियों की उगाही और दबंगई मारपीट के लिए चर्चा में है। पिछले दिनों एक बंदी ने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र भेजकर जेल प्रशासन पर ग़म्भीर आरोप भी लगाया था, आनन- फानन में कलेक्टर और एसपी भी जेल के अंदर निरीक्षण करने पहुँचे पर हुआ कुछ नही।

मौत हुई तो, हो गया उजागर

जेल प्रशासन ने हर बार की तरह इस बार भी जेल के चारदीवारी के अंदर हुए जानलेवा हमले की खबर को जेल के अंदर ही दफन करने भरसक कोशिश की, पर मामला तब बिगड़ा जब विचाराधीन बंदी की तबियत में कोई सुधार नही आया और उसकी मौत हो तब यह मामला खुलकर सामने आ गया।

स्क्रिप्ट समझै में नही आ रहा, जेल अधीक्षक मौन

जेल के चाहरदीवारी के अंदर हुए हमले और फिर सिम्स में हुई विचाराधीन बंदी के मौत की जो स्क्रिप्ट जेल अधीक्षक द्वारा बताई जा रही उसमें कई झोल है और सवाल भी। जब सोमवार को सुबह 9.30 बजे हमला हुआ तो घायल बंदी को कहा रखा गया। 24 घण्टे से अधिक समय तक कैसे और क्यो इसे गोपनीय रखा गया।
सीजीडीएनए ने जेल अधीक्षक खोमेश मंडावी को इस वारदात के सम्बंध में जानकारी लेने उनके मोबाइल नम्बर 9111825590 पर 2 बार काल किया परन्तु उन्होंने मोबाइल ही रिसीव नही किया।

उस व्यक्ति ने भी नही किया काल रिसीव

घायल विचाराधीन बंदी नीलू जगत को जेल से अस्पताल कब लाया गया, उसे कहा चोट लगी थी, वह कितने समय सिम्स में भर्ती रहा यह जानने सिम्स के चौकी प्रभारी सीपी पाण्डेय को उनके मोबाइल नम्बर 9926147988 पर 3 बार कॉल किया गया, जवाब हर बार एक ही मिला कि आप जिस व्यक्ति को कॉल कर रहे वे आपकी कॉल रिसीव नही कर रहे।

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