
0 कहा अभी यही से की शुरुआत, लेंगे सभी जगह जायजा, मिली खामियां

0 “नोटिस चिपकाओ, फोटो खिंचवाओ से नही टलेगा संकट उठाने होंगे सख्त कदम क्योकि सवाल सैकड़ो- हजारों जान का है
0 बगल में है निगम मुख्यालय बैंक और महत्वपूर्ण परिसर
बिलासपुर/ जब- जब देश मे कही कोई बड़ा हादसा होता है न्यायधानी का नगर निगम प्रशासन बेहद ग़म्भीर हो जाता है। अब यूपी की राजधानी लखनऊ के तिमंजिला कोचिंग सेंटर में आगजनी से हुई 15 मौतों के बाद फिर नगर न8गम और फायर सेफ्टी विभाग की टीम भीषण गर्मी में पसीना बहाने निकली । संयुक्त टीम ने निगम मुख्यालय विकास भवन के ठीक बगल के नवनिर्मित काम्प्लेक्स के प्रथम और द्वितीय तल में संचालित ऑक्सिडेशन क्लासेस का जायजा लिया। यहाँ एंट्री और एक्जिट एक ही पाया गया और भी खामियां बताई गई पर क्या ये तो अफसर भी नही बता सके।

न्यायधानी में बिना वैधानिक अनुमति के नियम कायदों को ताक पर रखकर एक- दो नही सैकडों हॉस्टल, ओयो होटल, स्कूल और कोचिंग सेंटर चल रहे, वो भी गली- गली में सैकड़ो- हजारों की जान को जोखिम में डालकर, कई बार मीडिया में खबरे आई, नगर निगम की एमआईसी तक मे मुद्दा उठा पर हुआ कुछ नही।
आलम ये है कि लोग खुद किराए में रहकर अपने घरों में स्कूल, हॉस्टल, ओयो और कोचिंग सेंटर चला रहे या किराए पर दे रखा है। शहर का कोई माई- बाप नही है जैसे हालात है। न तो इन संचालको ने कोई लाइसें, कोई अनुमति ली है, न कोई सेफ्टी का इंतजाम हैं।
जिम्मेदार विभाग ये तक चेक नही कर रहे कि घरेलू विद्युत कनेक्शन से कैसे होटल होस्टल, कोचिंग चल रहे, न निगम को मतलब है कि रिहायशी इलाकों में कैसे और क्यो व्यवसायी गतिविधियां चल रही है। ये भवन मालिक व्यवसायिक का टैक्स पटा रहे या घरेलू कोई देखने वाला नही है जब भी देश मे कोई बड़ा हादसा होता है, एक-दो दिवसीय चहलकदमी और नोटिस का खेल चलता है फिर सब ज्यो की त्यों हो जाता है।

फायर सेफ्टी के नाम पर खेल
न्यायधानी का फायर सेफ्टी विभाग पैसे देदो प्रमाण पत्र लेलो की तर्ज पर तो नही चल रहा इसकी जांच होनी चाहिए…? क्योंकि मामला आम नागरिको की जान-माल रक्षा का है। सीजीडीएनए की टीम ने कुछ हॉस्पिटल और काम्प्लेक्स संचालको से बातचीत की तो उनका कहना है कि मॉक ड्रील के बजाय निजी संस्थानों में लगाये गए फायर सेफ्टी उपकरण का भौतिक परीक्षण कराया जाना चाहिए ताकि पता चल सके कि शहर के हॉस्पिटल, हॉस्टल, स्कूलो, बड़े व्यवसायिक काम्प्लेक्स, मॉल और कोचिंग सेंटर में आने जाने आमजन और विद्यार्थी कितने सुरक्षित है, क्योकि यहां सैकड़ो विद्यार्थियों और लोगो का आना जाना है।
आग लगती है तो पम्प हाउस की दौड़ क्यो
फायर ब्रिगेड का अमला और संसाधन नगर निगम से नगर सेना में जाने के बाद व्यवस्था में सुधार की उम्मीद की जा रही थी पर हालात वैसे ही है, सवाल यह उठ रहा कि जब फायर ऑडिट के बाद भवनों को फायर सेफ्टी का प्रमाण पत्र दिया गया है तो आगजनी के दौरान दमकल को नगर निगम के पम्प हाउस तक दौड़ाने की जरूरत क्यो, क्योंकि
सभी भवनों में आपातकाल में पानी लेने के लिए बाहर प्वाइंट अनिवार्य किया गया है तो कही भी आगजनी होने पर उस इलाके के आसपास भवनों से आग बुझाने के लिए पानी क्यो नही लिया जाता क्यो 8-10 किलोमीटर दूर पम्प हाउस तक ट्रैफिक में गाडियां दौड़ाई जाती हॉ। क्यो जानमाल का नुकसान होता है।
अंकुर पाण्डेय, सम्पदा एवं अतिक्रमण निवारण प्रभारी नगर निगम बिलासपुर
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