
बिलासपुर,,, छत्तीसगढ़ में अफसर डंके की चोट में बड़ा बड़ा खेला कर रहे है। ऐसा ही एक और मामला सामने आया है, जिसमे राशन घोटाले और राशन कार्डों में फर्जी नाम एन्ट्री के आरोप में एक आरोपी के जेल यात्रा के बावजूद रिटायरमेंट के ठीक पहले एक अफसर ने जय गणेश प्राथमिक उपभोक्ता भंडार और आजाद महिला स्व सहायता समूह को दुकान वापस दे दी।
ये है स्टोरी…
कुछ साल पहले बिलासपुर जिले में शासकीय उचित मूल्य दुकान से जुड़े मामले में बड़ा खुलासा हुआ था, जिसमें लगभग मां और दो बेटे समेत एक पूरा परिवार ही आरोपी बना था, कार्रवाई के दौरान सिर्फ राशन घोटाला ही नहीं बल्कि राशन कार्डों में फर्जी नाम जोड़ने का भी मामला सामने आया था, जिसको लेकर उस समय खूब बवाल मचा जांच और कार्रवाई के बड़े- बड़े दावे भी किये गए मामले में एक आरोपी को जेल भी भेजा गया, लेकिन रिटायरमेंट के ठीक पहले कलेक्ट्रेट के अफसर ने जय गणेश प्राथमिक उपभोक्ता भंडार और आजाद महिला स्व सहायता समूह को क्लीन चिट देते हुए दुकानें वापस दे दी।


विभागीय जानकारों का कहना है कि दुकान वापसी के आदेश में झोल ही झोल है, बताया जा रहा कि कुछ दिनों पूर्व कांग्रेस नेता और पूर्व पार्षद सीताराम जायसवाल के दुकान जय गणेश प्राथमिक उपभोक्ता भंडार को अनियमितता बरतने पर सस्पेंड करके निरस्त किया गया था बहाली के बाद उसे वापस दिलाया गया और प्राथमिक उपभोक्ता भंडार के अध्यक्ष ने फिर से दुकान संचालन की जिम्मेदारी उसी संचालक को दे दी.. बीते 1 जुलाई को पुनः आजाद महिला स्व सहायता समूह के
फर्जी नाम जोड़ने के मामले में आरोपी रहे प्रबंधक प्रभार देने के कहा गया, जबकि भारी अनियमितता और फर्जीवाड़े के मामले में फ़ूड कंट्रोलर ने गत 31 दिसंबर 2025 को दोनों दुकान को बर्खास्त कर दिया था ।
ऐसा खेला गया पूरा खेल..
बताया जा रहा कि दुकान निरस्त होने के बाद दोनों भाइयों ने एडीएम कोर्ट में अपील लगाई, एडीएम कोर्ट ने दोनों दुकानों को वापस संचालन का आदेश दे दिया..
सवाल यह उठ रहा कि, 1877 फर्जी नाम जोड़ने वाले आरोपी को बिना RRC की कार्रवाई के दुकान कैसे दे दिया गया, जबकि शासन के नियम और अधिकारियों की माने तो जब कोई दुकानदार फर्जीवाड़ा करता है तो उसकी भरपाई चावल की तय कीमत के आधार पर वसूली का प्रावधान है, लेकिन कार्रवाई के बाद अब दुकान निरस्त होने तक आजाद महिला स्व सहायता समूह द्वारा राजस्व जमा नहीं कराया गया है, आरआरसी की कार्रवाई तहसीलदार द्वारा की जाती है, जब हमने रेवन्यू रिकवरी कार्रवाई के विषय में तहसील से प्राप्त की तो खाद्य शाखा के बाबू ने बताया कि उन्हें विभाग और न समिति से कोई पत्र मिला है जिससे आरआरसी की कार्रवाई की जा सके..
अब बड़ा सवाल यह उठता है कि नियमों को दरकिनार कर घोटालेबाज भाइयों को दुकान वापस करने की मांडवाली कितने में हुई और किसने कराई। क्या उच्चाधिकारियों ने रिटायर हो रहे अफसर को भ्र्ष्टाचार की विदाई दी है।
क्योकि इन्ही अफसर के खिलाफ पूर्व में प्रभारी मंत्री के आदेश पर अपने तरफ से नाम जोड़कर ट्रांसफर का खेल खेलने का आरोप भी लगा था।
आरोप है कि कांग्रेस नेता और जय गणेश प्राथमिक उपभोक्ता भंडार के अध्यक्ष ने अनियमितता बरतने वाले विक्रेता को संचालन की जिम्मेदारी क्यों सौंपी। क्या उन्हें या फ़ूड विभाग के अफसरो को इस बात की जानकारी नही है कि इन दुकानों में चावल के बदले नगदी का खुला खेल चल रहा है.. ऐसे में क्या बिना आरआरसी जमा किए दुकान वापस मिलने पर यह ईमानदारी से दुकान का संचालन कर पाएंगे, और क्या दुकान को किराए पर देकर मुनाफा कमाने की यह प्रक्रिया पर रोक लगेगी।
क्या शासन की यह महत्वाकांक्षी योजना ऐसे घोटालेबाजो को पालने पोसने के लिए है।
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