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प्रदेश के अंतिम छोर अंतिम व्यक्ति तक चिकित्सा पहुचाने का दावा डिंगडांग ,संभाग के जिला अस्पताल में मरीजों की रेलमपेल – डॉक्टरों का टोटा, न एनेस्थेटिस्ट है न आर्थोपेडिशियन अंचल के मरीज कर रहे शीर्षासन…!

बिलासपुर,,, न्यायधानी के संभागीय जिला अस्पताल में डॉक्टरों का टोटा इस कदर है, कि रिटायर्ड सिविल सर्जन से संविदा में काम लेना पड़ रहा है! वर्तमान में मेडिसिन विभाग के वे इकलौते डॉक्टर है! आर्थोपेडिक और एनेस्थीसिया विभाग का हाल सरकारी स्कूलों की तरह है, जहां कोई डॉक्टर ही नहीं है! एनेस्थेटिक डॉक्टर के टोटे के कारण ऑपरेशन नहीं हो पा रहे है!


जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉक्टर एस कुजूर की माने तो जिला अस्पताल के पर डे की ओपीडी 500 से 600 के करीब है, यानि स्थिति विश्वास है, पर डॉक्टर नहीं जैसा है! जिला अस्पताल में 135 प्रकार के जांच की सुविधा से सम्पन्न लैब है, सीटी स्कैन मशीन भी है! इसके बावजूद डॉक्टरों की कमी के चलते जिला अस्पताल में मरीजों को उचित चिकित्सा और परामर्श नही।मिल पा रहा, नतीजतन चिकित्सा के तमाम सरकारी दावों और चिकित्सा योजनाओं के ढिंढोरे के बीच आमजन जेवर, गहना, जमीन, मकान, खेत, बेचकर या मंगलसूत्र गिरवी रख कर शहर के निजी अस्पतालों में अपने परिजनों का उपचार कराने विवश है!

ये है! हालात….

मेडिसिन विभाग…

जिला अस्पताल के मेडिसिन विभाग में वर्तमान में कहने के लिए 2 डॉक्टर है! इनमें से 1 स्वास्थ्यगत कारणों से अवकाश पर है, वहीं रिटायर्ड सिविल सर्जन संविदा डॉक्टर अनिल गुप्ता के भरोसे पूरा मेडिसिन विभाग संचालित है!

आर्थोपेडिक विभाग….

जिला अस्पताल के हड्डी रोग विभाग में तो कोई आर्थोपेडिशियन डॉक्टर ही नहीं है!

एनेस्थिया विभाग…

जिला अस्पताल के एनेस्थिया विभाग का भी यही हाल है! ये विभाग भी डॉक्टर विहीन है!

गायनी विभाग…

जिला अस्पताल के गायनी विभाग में भी डॉक्टरों का टोटा है! वर्तमान में यहां 2 गायनकोलॉजिस्ट डॉक्टर है, और 1 डॉक्टर की कमी बताई जा रही है!

सर्जन है, एनेस्थिटस्ट नही

संतोषजनक बात यह है कि बताया जा रहा… सर्जरी विभाग डॉक्टरों के मामले में भरा पूरा है! पर किस काम का… क्योंकि जब एनेस्थेटिस्ट डॉक्टर ही नहीं है, तो मरीजो का ऑपरेशन होगा कैसे… ये बड़ा सवाल है!

ये हालात संभाग के जिला अस्पताल का है जहाँ 5-6 सौ मरीजों के पर डे की OPD ये बता रही है कि आज भी अंचलवासियों का विश्वास जिला अस्पताल पर है! पर हकीकत यह है! कि जिला अस्पताल खुद डॉक्टरों के एनीमिया से जूझ रहा है!

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शैलेन्द्र पाण्डेय / संपादक / मोबाइल नंबर : 7000256145
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