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न्यायधानी के तहसील में कांडो का नवाचार, साढ़े 17 करोड़ के फर्जी सर्पदंश मुआवजा कांड के बाद अब लू – मुआवजा फर्जीवाड़े के जांच के आदेश से फिर गर्माया माहौल…!

बिलासपुर / साढ़े 17 करोड़ के चर्चित फर्जी सर्पदंश मुआवजा कांड के साथ अब लू मुआवजा कांड के जांच की ख़बर है। इतना ही नही मामला फदकने के बाद यहां से तबादले के लिए हाथ पैर मारने वाले अफसरो का जुगाड़ जंतर भी फेल होने की खबर है।
श्री रामचरित्र मानस रामायण में तो सात ही कांड है, न्यायधानी के तहसील कार्यालय के कांडो और नवाचारों का कोई और छोर ही नही है। हिम्मत और हौसला तो देखिए बिलासपुर को न्यायधानी, स्मार्ट सिटी और महानगर के बाद अब नागलोक की उपाधि मिल गई वो भी साढ़े सत्रह करोड़ के मुआवजा फर्जीवाड़े के साथ,,,
विधानसभा में मामला उठने के बाद 17 प्रकरणों में 21 आरोपियो की गिरफ्तारी दर्शाई गई पूरे प्रदेश भर में बदनामी का खीर बगर गया, अफसरो और कर्मचारियों ने खूब आंदोलन नारेबाजी कर पैंतरा खेला, हाल ही में डीजीपी ने मामले की जांच एजेंसी से कराने का बयान देकर और सनसनी मचा दी, बड़े खिलाड़ी फिर सकते में आ गए और टोह लेने लगे कि संकट – वंकट तो नही है।
इतना ही नही तबादला एक्सप्रेस में सवार होने भी जोर लगाया, सूत्र बता रहे कि उसमें भी गाड़ी अटक गई।
खबर है कि शासन ने अब सर्पदंश मुआवजा फर्जीवाड़ा कांड के साथ लू फर्जी मुआवजा कांड के जांच के आदेश दिये है।
इससे पहले एक किसान के खेत की खड़ी फसल को मलबा डलवाकर कालोनी के रास्ते के लिए पटवाने और बिना आवेदन के एक नेता के नाम चढ़ाने, तहसील कार्यालय में दलाल के दंगल और गाली गलौज, इससे पहले दो महिला अफसरो का झगड़ा समेत कई मामले बेहद चर्चा में रहे…

एक जांच और

खबर मिली है कि जांच एक्सप्रेस में अब एक पटवारी के बड़का गड़बड़झाले की जांच शुरू कराने परवाना आया है, मामला सेंदरी इलाके के 20 हेक्टेयर जमीन को जो दो लोगो के नाम थी उनमें से एक को मृत बता फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर पटवारी द्वारा अपनी सास के नाम पर 800 रुपए पर स्क्वेयर फीट की दर से खरीदने और फिर उसी जमीन को 2000 प्रति स्क्वेयर फिट की दर से बेचकर प्रतिवर्ग फिट 1200-1200 का मुनाफा कमाने के आरोप है।
खबर है कि कलेक्टर ने निगम प्रशासन को मृत्यु प्रमाण पत्र की जांच कराने फरमान जारी किया है। अब क्या और कितना जांच होगी और आगे इस मामले का क्या हस्र होगा वो भी दिख जाएगा।

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इस मामले में जानकारी लेने एसडीएम मनीष साहू को काल कर चर्चा का प्रयास किया गया, परन्तु उनसे संपर्क नही हो सका
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शैलेन्द्र पाण्डेय / संपादक / मोबाइल नंबर : 7000256145
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