
बिलासपुर/ निर्माण ही नही सरकारी तंत्र का रवैया सरकार के सत्व की वसूली में भी हीला हवाला वाला हैं , अब मिलरों से जमा धान के बदले में चावल की वापसी को ही ले लीजिए। 19 दिन बाद खरीफ वर्ष 2026-27 के लिए समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का ऐलान हो गया। पर विपणन विभाग अभी तक राइस मिलरों से कस्टम मिलिंग का चावल जमा नही करा सका।

1 नवंबर से फिर सोसायटियां सज जाएगी और अभी तक पिछले साल 2025-26 के चावल की मिलरों से भरलाई नही कराई जा सकी। बताया जा रहा कि करीब 60 हजार टन चावल अभी भी बकाया है। जिसको लेकर फिर कलेक्टर ने कार्रवाई की चेतावनी दी है। बताया जा रहा है कि विभाग को मिलरों से लगभग 2.20 लाख टन चावल लेना था, अभी तक विभाग से 1 लाख 60 हजार टन चावल जमा ले चुका है, वही 60 हजार टन चावल अभी भी मिलरों से लेना शेष है। जिसके लिए झप्पी देते देते फिर सत्र 2026-27 के लिए धान खरीदी का दिन आ गया।
दो दिन पूर्व कलेक्टर ने फिर रिसाइक्लिंग बन्द करने और शेष चावल के कोटे को जल्द से जल्द वेयरहाउस में जमा कराने मिलरों और अफसरो की बैठक लेकर सख्त हिदायत देते हुए एफआईआर कराने तक की बात कही।
गौरतलब है कि धान का कटोरा और अन्नदाताओं की धरती कहलाने वाले छत्तीसगढ़ की न्यायधानी के राशन दुकानों से लेकर पायलट प्रोजेक्ट वाले ग्रेन एटीएम तक हाल ही में चावल के टोटे की लगातार खबरे आई, उस दौरान भी मिलरों द्वारा चावल जमा न कराने के कारण दिक्कत की बात सामने आई थी।
