
00 एनटीपीसी राखाड बाँध प्रभावित रलिया, रांक, हरदा, सुखरीपाली, भिलाई, बेलटुकरी, परसदा, जयराम नगर के ग्रामीणों का जीना दुश्वार

बिलासपुर,,, एनटीपीसी सीपत के राखड बाँध की वजह से प्लांट प्रभावित रलिया, रांक, हरदा, सुखरीपाली, भिलाई, बेलटुकरी, परसदा, जयराम नगर सहित 25 से 30 गाव के लोगो का जीवन नरक के समान हो गया है, राखड बाँध के उड़ने वाले धुल से लोगो को जीना दुश्वार हो गया है वही राखड की वजह से लोगो को कई गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है| प्रभावित क्षेत्र के जल स्त्रोत बुरी तरह से बर्बाद हो गए है वही नदी व तालाब के पानी प्रदूषित हो गए है हरियाली के नाम पर यहाँ केवल राखाड ही राखाड नजर आता है| राखाड बाँध प्रभावितों के लिए एनटीपीसी प्लांट प्रबन्धन द्वारा सीएसआर मद से कई विकास कार्य कराने का दावा किया जाता है मगर धरातल पर ग्रामीणों को किसी भी तरह के लाभ नहीं मिल पा रहे है|
जिले के सीपत में स्थित एनटीपीसी प्लांट की स्थापना को 24 साल हो गए हैं. जब इसकी शुरुआत हुई थी तब स्थानीय लोगों ने विकास, रोजगार और बेहतर जीवन स्तर का सपना देखा था, लेकिन आज यह सपना धुंधला हो गया है. बिलासपुर जिले के सीपत में स्थित एनटीपीसी प्लांट की स्थापना को 24 साल हो गए हैं. जब इसकी शुरुआत हुई थी तब किसान और ग्रामीणों ने विकास, रोजगार और बेहतर जीवन स्तर का सपना देखा था, लेकिन आज यह सपना धुंधला हो गया है. प्रदूषण, रोजगार की कमी, और बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने ग्रामीणों की उम्मीदें तोड़ दी हैं. अब हालात इतने खराब हैं कि लोग गांव छोड़ने को मजबूर हैं. ग्राम रांक और आसपास के गांवों में प्रदूषण की स्थिति भयावह है. ग्रामीणों का कहना है कि प्लांट से निकलने वाली राख की आंधी ने उनका जीना दुश्वार कर दिया है. घरों, फसलों और पानी पर राख जम जाती है, जिससे लोग गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं.
रांक में गुड व तालपोलिंन वितरण में भेदभाव : एनटीपीसी
प्रबधन प्लांट प्रभावित गाव में भेदभाव कर अपनी रोटिया सेकने में लगे हुए है, प्लांट के एच आर विभाग के शैलेश चौहान एवं ग्रामीण के बीच हुए बातचीत का आडियो सामने आया है जिसमे ग्रामीण द्वारा प्लांट प्रबंधन द्वारा रांक गाव के केवल दो मोहल्लो में ही गुड बाटने की बात कही जिसपर एचआर विभाग के शैलेश चौहान ने आगे और भी गुड बाटे जान एकी बात कही वही राखड प्रभावित गाव के कुछ घरो में तारपोलिंन बाटने के सम्बन्ध में बात की तो उन्होंने सभी के लिए तारपोलिंन नहीं होने कहा जिससे यह साफ़ हो गया कि एसी- व वीआईपी कमरों में बैठने वाले अधिकारी महज दिखावे के लिए यह कार्य करते है प्रभावितों की हित की चिंता ईन्हें नहीं है|
रोजगार, विकास, आर्थिक उन्नति कोसो दूर : एनटीपीसी
राखड़ डेम प्रभावित ग्रामो के ग्रामीणों ने बताया कि राख और प्रदूषण की समस्या के चलते नई पीढ़ी गांव को छोड़कर जा रही है. युवा रोजगार और बेहतर जीवन की तलाश में पलायन कर रहे हैं, जबकि बुजुर्ग और बाकी परिवार इस प्रदूषण के बीच रहने को मजबूर हैं. हवा में घुली राख उनके फेफड़ों तक पहुंच रही है, जिससे गंभीर बीमारियां हो रही हैं. एनटीपीसी सीपत प्लांट से जिन सपनों की शुरुआत हुई थी, आज वही ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बन चुका है. रोजगार की कमी और प्रदूषण ने उनके जीवन को बदतर बना दिया है. अब यह देखना होगा कि एनटीपीसी प्रबंधन इन समस्याओं को हल करने के लिए क्या कदम उठाता है या फिर ग्रामीणों को अपने अधिकारों के लिए और बड़ा आंदोलन करना पड़ेगा.
राखाड बाँध में फंसी मूक गाय, दलदल से निकालने भारी मशक्कत :-
एनटीपीसी सीपत के कौड़िया राखड बाँध में एक मूक गाय जा फंसी, ग्रामीणों व स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओ को जब इसकी जानकारी हुई तो गाय को निकालने भारी मशक्कत करनी पड़ी, समाचार लिखे जाने तक गाय को निकालने के लिए ग्रामीण भिड़े रहे|



