
0 उम्मीद थी सिस्टम के शुरू होने से सुधरेगी ट्रैफिक व्यवस्था जाम से मिलेगी निजात

0 सिस्टम और जनप्रतिनिधियों को कोस रहे गरीब, कह रहे कहा से लाये इतना पैसा

बिलासपुर। 100 में 87 गरीब फिर भी 5 माह में केवल आईटीएमएस से 8 करोड़ साढ़े 64 लाख का चालान कट गया। मामला ट्रफिक नियमो के उल्लंघन का है, इस आंकड़े ने आमजनमानस को सिर धुनने मजबूर कर दिया कि क्या ये केवल चुनावी गरीब है, और यदि ये घोषित गरीब हैं तो 2000- 2000 रुपये चालान पटाने के लिए लाए कहां से। और उससे भी बड़ा सवाल यह है कि करोड़ो की इंटीग्रेटेड ट्रफिक मैनेजमेंट सिस्टम के बाद भी शहर की ट्रफिक व्यवस्था इतनी बदहाल क्यो है जगह-जगह जाम के कारण लोगो को खिजना पड़ रहा। क्या यही इंटीग्रेटेड ट्रफिक मैनेजमेंट सिस्टम है।
खाद्य विभाग के दर्ज आकड़ो की माने तो बिलासपुर जिले में कुल 564014 राशन कार्ड धारक परिवारों में से 71381 परिवार एपीएल की श्रेणी में आते है, वही 4 लाख 92 हजार 633 परिवार अंत्योदय, निराश्रित, अन्नपूर्णा, प्राथमिकता और निःशक्तजन कार्डधारी है। यानि जिले के 4 लाख 92 हजार से अधिक यानि 87 फीसदी गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे गरीब है, जिनकी गरीबी दूर करने सरकार उन्हें मुफ्त में चावल से लेकर आयोडीन नमक समेत अन्य तरह के अनाज और चिकित्सा सुविधा मुहैया करा रही। फिर इन्ही चुनावी गरीबो से 8 करोड़ साढ़े 64 लाख की वसूली क्या उचित है, सवाल गरीबो का है।

दोहरी मार
कोरोनकाल ने नौकरियाँ और रोजगार छीन ली, संक्रमण के डर और लोकडाउन के दौरान लोग दो-दो पैसा जोड़ रखा जमा पूंजी तक खा गए, महंगाई भी डेढ़ से दो गुना बढ़ गई जिसके चलते उन्हें दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। आज भी शहर में कईं ऐसे परिवार है जो 5-7 हजार मासिक वेतन पर अपना और अपने परिवार का पेट पाल रहे, ऐसे में 2000-2000 रुपये का चालान उनके ऊपर किसी वज्रपात आए कम नहीं, वे परिवार का पेट काट कर्ज लेकर चालान पटाने विवश है।
ट्रफिक व्यवस्था में सुधार का दावा उगल रहा चालान
2 साल पूर्व कांग्रेस शासन काल मे पूर्व मुख्यमंती भूपेश बघेल के हाथों तामझाम के साथ 73 करोड़ 41 लाख की लागत से तैयार तारबाहर थाना परिसर के कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का लोकार्पण कराया गया था। तब दावा किया गया था कि इससे शहर की यातायात व्यवस्था को सुरक्षित और सुव्यवस्थित करने मदद मिलेगी। पर शहर की ट्रफिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के बजाए करोड़ो की लागत से स्थापित ये सिस्टम ऑनलाइन चालान उगलने की मशीन बनकर रह गया, शहर की ट्रफिक व्यवस्था का हाल तो जग जाहिर है। जबकि शहर के मुख्यमार्गों और चौक- चौराहो में ट्रैफिक व्यवस्था की निगरानी और नियंत्रण के लिए 550 कैमरे लगवाए गया है, तब ये हाल है।
क्या है आईटीएमएस
इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) का काम विभिन्न तकनीक के जरिये यातायात प्रबंधन को स्मार्ट और कुशल बनाकर जाम जैसी समस्या का निदान करना है,, पर आलम यह है कि शहर के किसी भी सड़क पर निकल जाइये ट्रफिक व्यवस्था का नजारा आम और, जगह -जगह जाम है, और इतना जाम है कि लोग राह चलते
झुंझला रहे। जबकि दावा था कि मुख्यमार्गो और चौक- चौराहो पर लगाये गए सीसीटीवी कैमरों और सेंसरों के माध्यम से यातायात व्यवस्था की निगरानी कर स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नल और यातायात प्रबंधन से शहर वासियों को जाम और दुर्घटनाओ से निजात दिलाने का।
मैन्युअल चालान का भी ऐसा ही हाल
ये नजारा चाटीडीह – शनिचरी रपटा का है। यहाँ अमला आने-जाने वाले वाहन धारकों को रोक रहा, सड़क किनारे चालान की रसीद काटी जा रही जहाँ अमला गाड़ियों को रोक रहा उसके दोनों तरफ वाहनधारक मरे जिये गाड़ी मोड़ चालनी कार्रवाई के डर से भाग रहे, एक बाइक सवार तो हड़बड़ी में भागने के चक्कर मे रपटा में कार से टकराते बाल- बाल बच गया जिससे बड़ी अनहोनी टल गई।
000
पिछले 5 माह में ट्रैफिक नियमो का उल्लंघन करने वालो को आईटीएमस के जरिये उनके पटे पर ऑनलाइन चालान भेजा गया है…




