
बिलासपुर। श्री कृष्ण जन्माष्टमी की रात जॉन क्रमांक 7 के कर्मचारियों से मारपीट के मामले में आरोपियों की ओर से सिटी मजिस्ट्रेट अरुण खलको पर पैसों की मांग पूरी न होने पर जमानत न देने के आरोप ने एक बार फिर प्रशासन के मजिस्ट्रियल अफसरों के कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। लोगो का कहना है कि कोई एक्शन नही हो रहा इसलिए ऐसा खुल्ला खेल चल रहा, इसके पहले भी एसडीएम कार्यालय के भृत्य का ट्रांसफर का मामला सुर्खियों में रहा, वो भी प्रभारी मंत्री के 10 कर्मचारियो के ट्रांसफ़र सूची में पुछल्ला जोड़कर 11 करने का मामला भी सामने आ चुका है पर हुआ कुछ नही।

आरोपियों की ओर से अधिवक्ता संजय कुमार गोयल ने बाकायदा जिलाधीश से इसकी शिकायत भी की है । ये रही शिकायत की प्रति…

कलेक्टर को की गई शिकायत में कहा गया है गत 16 अगस्त जन्माष्टमी की रात सरकंडा थाने से चंद कदम की दूरी पर बहतराई चौक के लिंगियाडीह स्कूल के सामने जॉन कार्यालय के स्टाफ और यहां के युवाओं के बीच किसी बात को लेकर मारपीट हुई थी। सरकंडा पुलिस ने 4 आरोपियो मुका मुर्का यादव, निखिल चौरसिया, जीवन निषाद और अंकित गचर्य के खिलाफ प्रतिबंधात्मक धारा 151 के तहत ईस्तगासा सिटी मजिस्ट्रेट अरूण खलखो साहब के समक्ष प्रस्तुत किया, पर सिटी मजिस्ट्रेट ने आरोपियों को जमानत पर छोड़ने के एवज में 20,000/- रूपये मांग की आरोप है कि आरोपियों की ओर से 10,000/- रूपये देने की पेशकश भी की गई, पर रकम पूरा न होने पर
उनके द्वारा आरोपियों को छोड़ने से इनकार कर दिया गया।
आरोपियों की ओर से अधिवक्ता द्वारा सिटी मजिस्ट्रेट पर लगाया गया ये आरोप बेहद गम्भीर है, अब देखना होगा कि कलेक्टर इस मामले में क्या एक्शन लेते है,,,
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कोई गोयल अधिवक्ता है, मैने कलेक्टर साहब को शिकायत से सम्बंधित जानकारी दे दी है, कि वे लोग जमानत के लिए दबाव बना रहे थे नही दिया इसलिए ये शिकायत किये जो निराधार है।
अरुण खलको,
सिटी मजिस्ट्रेट बिलासपुर



