
बिलासपुर। तो क्या बिलासपुर का तहसील कार्यालय मिस्टर इंडिया चला रहा, क्या यहा के दस्तावेज की कोई अहमियत नही है क्योकि खुद तहसीलदार ने तहसील से तीन छात्राओं के मेडिकल प्रवेश लिए जारी ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्रों को नियमों के तहत जारी न होने और दस्तखत व सील तक को फर्जी बता रहे उन्होंने इस आशय रिपोर्ट कलेक्टर संजय अग्रवाल को सौंपी है ऐसी खबर आ रही है, इस खबर ने प्रमाण पत्रों ही नही यहाँ से जारी जमीन जायदाद से सम्बंधित दस्तावेज को भी कटघरे में ला ढिया है। इधर तीन छात्राओं का मेडिकल कॉलेज में प्रवेश निरस्त कर दिया गया है। इतने गम्भीर मामले में क्लर्क प्रहलाद सिंह नेताम को नोटिस जारी कर प्रभार से हटाकर इस गरम मामले को ठंडा करने केवल खानापूर्ति की गई है।
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए (ईडब्ल्यूएस) प्रमाण पत्र का प्रावधान किया गया है, ये फर्जीवाडा इसी का है, दरअसल नीट परीक्षा पास करने के बाद छात्राओं ने दाखिले के लिए ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र के लिए निर्धारित दस्तावेज तहसील कार्यालय में अपने अधिवक्ता के माध्यम से पेश किया, इन 3 छात्राओं ने इन प्रमाण पत्रों को काउंसिलिंग के दौरान मेडिकल कालेज में प्रवेश के लिए प्रस्तुत भी कर दिया लेकिन मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया के दौरान संचालक चिकित्सा शिक्षा (डीएमई) ने दस्तावेजों को वेरिफिकेशन के लिए तहसील भेजा। मीडिया में खबरे आने से मची फजीहत के करीब पखवाड़े भर पहले छात्राओं और उनके परिजनों ने तहसील कार्यालय में तलब कर उनका बयान दर्ज किया गया, दूसरे दिन फिर छात्राओं और उनके परिजनों को यह कहकर फिर से आवेदन देने कहा गया कि आपका दूसरा प्रमाण पत्र बना देंगे, पर बात नही बनी तहसीलदार ने जांच के बाद तीनों प्रमाणपत्र नियमों के तहत जारी न होने और दस्तखत व सील को फर्जी होने का हवाला देते हुए रिपोर्ट कलेक्टर संजय अग्रवाल को सौंप दी।
जांच में पता चला कि जारी किए गए प्रमाणपत्रों पर अलग-अलग सील लगी हैं और तहसीलदार के हस्ताक्षर भी मेल नहीं खा रहे जबकि प्रमाणपत्र जारी होने की अवधि में केवल एक ही तहसीलदार पदस्थ थीं इसका भी जिक्र है।
इधर परिजनों का कहना है कि इसमें उनकी क्या गलती है उन्होंने नियमानुसार ऑनलाइन आवेदन के लिए मांग के अनुरूप दस्तावेज जमा कराये जब जब तलब किया गया वे सत्यापन के लिए उपस्थित हुए यदि मामला फर्जीवाड़े का है तो ये तहसील कार्यालय का फाल्ट है।
इस फर्जीवाड़े ने एक बार फिर तहसील कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए है। इससे भी गम्भीर बात ये है कि ऑनलाइन आवेदन के रिकार्ड तक गायब है।

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