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निगम के अतिक्रमण शाखा के ठेका कर्मी कह रहे सब दिन चंगा औ तिहार के दिन… 4 माह से ठेकेदार ने नही दिया वेतन क्या दिवाली में भी करना पड़ेगा फांका

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0 अनजान बने बैठे नगर निगम के जिम्मेदार अफसर
0 मवेशी पकड़ने और अतिक्रमण हटाने और हाड़तोड़ बेगारी के बाद भी ये हाल


बिलासपुर। नगर निगम के अतिक्रमण शाखा के ठेका कर्मी ठेकेदार और अफसरों के दाबी फार्मूले की मार झेलने विवश है। उन्हें 3-3 माह का पारिश्रमिक रोककर एक माह का भुगतान किया जा रहा।  विगत 4 माह से बिना पारिश्रमिक के कार्य कर रहे की चलो दिवाली के पहले भुगतान हो जाएगा पर अब तक नही हुआ। ठेका श्रमिक अफसर और ठेकेदार को कोस रहे कि इस बार दिवाली तक में अभी तक पेमेंट नही मिला।  वे अब भी अफसर और ज्योति ट्रेडर्स के ठेकेदार  की बाट जोह रहे है।


सवाल यह उठ रहा कि अतिक्रमण शाखा के जिन ठेका कर्मियों से अतिक्रमण हटाने, बिना प्रशिक्षण के मवेशी पकड़वाने जैसा खतरनाक काम लेने थानों और अफसरों के यहां हाड़तोड़ बेगारी कराने वाले श्रमिको का पारिश्रमिक आखिर डकार कौन रहा है। जिम्मेदार अफसर इसकी मोनिटरिंग क्यो नही करते कि हाड़तोड़ मेहनत करने वाले ठेका कर्मियों को उनका मेहनताना समय पर मिल रहा या नही बेगारी तो सब करा रहे।
उससे भी ताज्जुब बात यह है कि निगम जैसी संस्था में शासन प्रशासन द्वारा तय पारिश्रमिक के बजाय महज 9230 रुपये का भुगतान कियाबज रहा है। इतना ही नही इसमे भी अनुपस्थिति और फर्जी एडवांस दर्शा रसूखदार ठेकेदार उनके मेहनताने का पैसा तक डकार दे रहे।


एडवांस घोटाले पर सब मौन

सब हस्तिनापुर की कुर्सी से बंधे है क्योंकि ठेकेदार या तो निगम सरकार के सत्तासीन पार्टी के है या फिर विपक्ष के। ये ही बड़े नेताओं के इर्द गिर्द दिखते है इसलिए अफसर बेबस है। वही ढोल में दोनों तरफ पोल है इसलिये गरीबो के नाम पर हाय तौबा मचाने वाले राजनीतिक दल के नेता भी चुप है। इन नेताओं ने इसीलिये  गरीब श्रमिको के एडवांस घोटाले के नाम पर किये गए 93 करोड़ के गोलमाल पर मोह तक नही खोला। जांच हुई जांच में शिकायत सही पाए गए तो तत्कालीन उपायुक्त श्री पात्रे ने ठेकेदारो पर सख्ती बरतनी शुरू की कि गरीब श्रमिको के मेहनत का का 93 करोड़ रुपया जो उनके पारिश्रमिक से एडवांस दिखाकर काटा गया है देना पड़ेगा। उल्टे दबंग ठेकेदारो ने उस अफसर का ही तबादला करा दिया जिन्होंने एडवांस घोटाले के नाम पर 93 करोड़ के घोटाले का पर्दाफाश किया था।


क्या ये मानव अधिकारों का हनन नही

गरीब ठेका कर्मियों के तीन-तीन माह का पारिश्रमिक रोककर ठेकेदारो द्वारा चौथे माह 1 माह के पारिश्रमिक का भुगतान करना क्या ये मानव अधिकार का हनन नही है। सवाल यह उठ रहा कि शहर की सड़कों पर अपनी गाड़ियों के आगे मानवाधिकार आयोग की पट्टी लगाकर फर्राटे भरने वाले वे पदाधिकारी क्यो इनकी ओर ध्यान नही देते। कि वे कैसे अपना परिवार पालते होंगे।


नाम ज्योति ट्रेडर्स काम गरीबो के घर दिवाली में अंधेरे का


ठेका फर्म का नाम ज्योति ट्रेडर्स है जो इन्ही हाड़तोड़ श्रमिको के भरोसे सालों से कमाई कर रहा। पर इसने भरी दिवाली में श्रमिकों को अब तक उनके पारिश्रमिक का भुगतान नही किया जिससे गरीब श्रमिको की दिवाली अभी तक उदासी भरी है वो कह रहे सोमवार भर का दिन है कल भी नहो मिला तो क्या करेंगे।


अफसरों की मिठाई या होगा भुगता


ठेका श्रमिको का कहना है कि उम्मीद तो कम ही है क्योंकि सोमवार के बाद दिवाली की छुट्टी हो जाएगी। ठेकेदार अफसरों के घर दिवाली की मिठाई भेंट करेगा या हमे मेहनताना देगा।

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