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बीट पुलिसिंग के दावे का ये हाल, जेल से जमानत पर छूटे आरोपी-अपराधियो के स्वागत में जूलूस निकाल युवा दिखा रहे भौकाल, दो थाना क्षेत्र से गुजरे सरकंडा पुलिस ने थाम्हा…

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बिलासपुर/ बीट पुलिसिंग के दावे का क्या हाल है, आप भी जान लीजिए हत्या के प्रयास के मामले में डेढ़ साल बाद जमानत पर छूटे आरोपी का किसी सेनानी की तरह फूलों की माला पहना स्वागत किया गया के बाद 4 दर्जन बाइक में सवार युवकों ने सिविल लाइन, सिटी कोतवाली क्षेत्र होते हुए बाइक रैली निकाल सरकंडा सीपतरोड तक आतिशबाजी कर, स्टिक राड, चाकू लहराकर भौकाल दिखाया। जगह जगह जाम लगा, सूचना पर जब सरकंडा पुलिस मौके पर पहुँची भाईगिरी का जलवा दिखाने वाले चट्टे- बट्टे भाग निकले। जेल से छूटा आरोपी व उसका साथी पुलिस के हत्थे चढ़ गए। तलाशी में दोनो के पास चाकू मिला। इज़के बाद आरोपी और उसके साथी को फिर से सलाखों के पीछे धकेल दिया गया।
करीब डेढ़ साल पहले लोयला स्कूल के पास छात्र व उसके भाई के साथ मारपीट और चाकूबाजी हुई थी। पुलिस ने मामले में चिंगराजपारा निवासी हर्ष उपाध्याय को गिरफ्तार कर न्यायालय के आदेश पर जेल दाखिल किया था। गत 23 मार्च को जब हर्ष जेल से जमानत पर छूटा तो 30 से 40 बाइक में युवक उसे लेने पहुँचे, जेल से बाहर निकलते ही हर्ष का फूलों की माला पहनाकर स्वागत किया गया। जेल से किसी योद्धा की तरह उसके स्वागत में बाइक रैली निकाल हंगामा मचाते ये हुड़दंगी सिविल लाइन, सिटी कोतवाली इलाके से होते हुए बेखौफ सरकण्डा चिंगराजपारा होते जश्न मनाते सीपतरोड पटवारी प्रशिक्षण केंद्र तक पहुँच गए, इसी दौरान किसी ने सरकंडा थाने में सूचना दी कि 40-50 बाइक में कुछ युवक जेल से छूटे एक आरोपीके स्वागत में बाइक रैली निकाल स्टिक राड व हथियार दिखाकर लोगों को डरा धमका जगह जगह बाइक रोककर आतिशबाजी कर ट्रैफिक जाम कर रहे। सरकण्डा टीआई प्रदीप आर्य सूचना पर स्टाफ के पटवारी प्रशिक्षण केंद्र के पास पहुचे तो पुलिस को देखकर युवक भागने लगे। पुलिस ने पीछा कर जेल से छूटे चिंगराजपारा सूर्या चौक निवासी आरोपी हर्ष उपाध्याय पिता मनो उपाध्याय 21 साल और उसके साथी डबरीपारा निवासी अजय साहू पिता अमित साहू 20 साल को धरदबोचा,दोनो से चापड़ और चाकू बरामद होने पर पुलिस ने 25, 27 आर्म्स एक्ट के तहत दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
पब्लिक को समझ मे नही आ रहा क्या यही बीट पुलिसिंग है जिसको लेकर इतना हल्ला मचाया जा रहा, सिटी कोतवाली और सिविल लाइन पुलिस आखिर कहा थी जो उन्हें ये हुड़दंगी दिखाई नही दिए, क्या केवल सीधे साधे पब्लिक को बेवजह रौब दिखाकर वसूली करना बीट पुलिसिंग है।

बिलासपुर के युवाओं का आइकॉन कौन

पता नही बिलासपुर के युवा पीढ़ी को हो क्या गया है, जिन्होंने एक राजनैतिक दल के पोषित आरोपी, अपराधी को अपना आइकॉन बना रखा है, बिगड़ैल युवाओं में भाईगिरी का शौक चर्राया ।

क्या पुलिस के पास नही कोई जवाब

पर पुलिस को क्या हो गया क्योकि इस तरह का ये पहला मामला तो है नही, इससे पहले भी जेल और जुलूस के खेल के कईं मामले सामने आ चुके है, क्या ऐसे तत्वो पर अंकुश लगाने पुलिस के पास कोई माकूल जवाब नही है, आखिर कब तक युवापीढ़ी भाईगिरी के ग्लैमर और शहरवासी इस तरह का आतंक झेलते रहेंगे।

आईटीएमएस का भी हाल बेहाल

173 करोड़ के आईटीएमएस और कंट्रोल कमांड यूनिट की स्थापना के बाद पूरे शहर के सर्विलांस पर होने और सड़क पर होने वाले किसी भी आपराधिक गतिविधियों के निगरानी का भी दावा किया गया था तो क्या युवा प्रभात फेरी निकाल रहे थे जो नही दिखा…

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