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मौत के मुंह से लौटी नन्ही वर्तिका: सर्पदंश से जंग जीतकर बनी जिंदगी की मिसाल, श्री शिशु भवन अस्पताल में डॉक्टरों की मेहनत लाई रंग, तीन दिन की जद्दोजहद के बाद मुस्कान लौटी, परिवार को मिला नया जीवन…

बिलासपुर_सक्ती,,,  21 अप्रैल 2026, मंगलवार की दोपहर करीब 4 बजे, सक्ती के ग्राम जामपाली (पोस्ट नदौरखुर्द) निवासी प्यारेलाल बंजारे और उनकी पत्नी सोनम बंजारे अपनी दो वर्षीय पुत्री वर्तिका बंजारे को गंभीर हालत में श्री शिशु भवन अस्पताल लेकर पहुंचे… बच्ची अचेत थी…! शरीर निस्पंद, मुंह से झाग निकल रहा था और वह खुद से सांस लेने में असमर्थ थी। परिजनों की आंखों में डर और बेबसी साफ झलक रही थी।


अस्पताल पहुंचते ही डॉ. श्रीकांत गिरी और उनकी टीम ने बिना समय गंवाए इलाज शुरू किया। बच्ची को तत्काल वेंटिलेटर सपोर्ट पर लिया गया और श्वास नली में ट्यूब डालकर उसकी सांसों को नियंत्रित किया गया। प्रारंभिक जांच में स्पष्ट कारण सामने नहीं आया, लेकिन लक्षणों के आधार पर डॉक्टरों ने सर्पदंश की आशंका जताई और उसी अनुसार उपचार शुरू किया।


अगले तीन दिन बेहद चुनौतीपूर्ण रहे। डॉक्टरों और स्टाफ ने लगातार निगरानी और उपचार जारी रखा। आखिरकार तीसरे दिन वर्तिका ने धीरे-धीरे आंखें खोलीं, जो पूरे परिवार के लिए उम्मीद की किरण बन गई। इसके बाद उसकी हालत में लगातार सुधार हुआ—उसे वेंटिलेटर से हटाकर ऑक्सीजन सपोर्ट पर लाया गया और फिर वह सामान्य रूप से बैठने लगी।


कुछ ही दिनों में वर्तिका पूरी तरह स्वस्थ हो गई और अस्पताल से डिस्चार्ज कर दी गई। अपनी बच्ची को स्वस्थ देखकर माता-पिता भावुक हो उठे। उन्होंने कहा, “हमने उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन यहां हमारी बच्ची को नया जीवन मिला है।”
अस्पताल प्रबंधन के नवल वर्मा ने बताया कि यह टीमवर्क, समय पर निर्णय और समर्पित चिकित्सा सेवा का परिणाम है। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि सही समय पर मिला उपचार किसी भी संकट को मात दे सकता है।

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Santosh Shriwas
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