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ट्रिपल इंजन सरकार के नक्सलवाद के खात्मे के दावे को फिर बड़ी चुनौती, कांकेर-नारायणपुर सीमा पर बड़ा हादसा,आईईडी ब्लास्ट में डीआरजी के इंस्पेक्टर और जवान समेत 3 शहीद, एक घायल…

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कांकेर/नारायणपुर। नक्सलवाद के खात्मे के दावों के बीच शनिवार को छत्तीसगढ़ के कांकेर-नारायणपुर सीमा क्षेत्र से एक दर्दनाक घटना सामने आई है। नक्सल प्रभावित इलाके में सर्चिंग अभियान पर निकली डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी) टीम और सरकारी दावे को तब बड़ा झटका लगा, जब एक प्लांटेड आईईडी को निष्क्रिय करने के दौरान हुए विस्फोट में डीआरजी के एक इंस्पेक्टर सहित तीन जवान शहीद हो गए, जबकि एक अन्य जवान ग़म्भीर घायल बताया जा रहा।


मिली जानकारी के अनुसार, छोटे बेठिया थाना क्षेत्र में डीआरजी की टीम नियमित सर्चिंग अभियान पर निकली थी। इसी दौरान जवानों को संदिग्ध आईईडी की जानकारी मिली। सुरक्षा के मद्देनज़र बम निष्क्रिय करने की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन इसी दौरान जोरदार विस्फोट हो गया। ब्लास्ट इतना शक्तिशाली था कि मौके पर ही तीन जवानों ने दम तोड़ दिया।


शहीद जवानों में डीआरजी इंस्पेक्टर सुखराम वट्टी, कॉन्स्टेबल कृष्णा कोमरा और कॉन्स्टेबल संजय गढ़पाले शामिल हैं। वहीं, इस घटना में घायल हुए जवान परमानंद कोमरा को तत्काल इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी स्थिति पर डॉक्टरों की निगरानी बनी हुई है।
इस घटना ने एक बार फिर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों के सामने मौजूद चुनौतियों को उजागर कर दिया है। लगातार चलाए जा रहे ऑपरेशनों और नक्सल विरोधी अभियानों के बावजूद नक्सली अब भी सुरक्षा बलों को निशाना बनाने  सक्रिय हैं। खासकर आईईडी जैसे घातक हथियारों का इस्तेमाल कर वे जवानों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सरकारी दावे को खुली चुनौती रहे हैं।
घटना के बाद इलाके में सर्च ऑपरेशन और तेज करने की बात कही जा रही, अतिरिक्तबलो को क्षेत्र में सक्रिय नक्सलियों की तलाश की में लगाया गया है।

इस घटना ने नक्सल विरोधी अभियान की जमीनी हकीकत को सामने लाते हुए यह संकेत दिया है कि खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है…

ट्रिपल इंजन की सरकार ने किया था दावा

केंद्रीय गृहमंत्री ने 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करने का दावा किया था। सरकार का दावा है कि सुरक्षाबलों के सटीक ऑपरेशन, सरेंडर नीति और बस्तर में विकास कार्यों (‘ और स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए ‘बस्तर पंडुम’ जैसे आयोजन किए गए हैं। सरकार की इस रणनीति ने नक्सलवाद की कमर तोड़ दी लेकिन हकीकत सामने है…

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