
बिलासपुर,,,, जिले में निजी विद्यालयों की अनियमितताओं को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है! NSUI के प्रदेश सचिव रंजेश सिंह के नेतृत्व में की गई… शिकायतों के बाद जिला शिक्षा विभाग ने जांच तो शुरू की… लेकिन जमीनी स्तर पर सुधार न होने से सवाल खड़े हो रहे हैं! आरोप है! कि कई स्कूल अब भी शासन के नियमों की खुलेआम अनदेखी कर रहे हैं!


अभिभावकों की सबसे बड़ी परेशानी अत्यधिक फीस और महंगी किताबों की बाध्यता है! कई स्कूल छात्रों को केवल तय दुकानों से निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं! जबकि बिलासपुर में निजी विद्यालयों की अनियमितताओं को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है! NSUI के प्रदेश सचिव रंजेश सिंह के नेतृत्व में की गई शिकायतों के बाद जिला शिक्षा विभाग ने जांच तो शुरू की, लेकिन जमीनी स्तर पर सुधार न होने से सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि कई स्कूल अब भी शासन के नियमों की खुलेआम अनदेखी कर रहे हैं!

अभिभावकों की सबसे बड़ी परेशानी अत्यधिक फीस और महंगी किताबों की बाध्यता है। कई स्कूल छात्रों को केवल तय दुकानों से निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं, जबकि एनसीईआरटी और निःशुल्क निगम पुस्तकों का उपयोग सुनिश्चित करना नियमों में शामिल है। इसके अलावा, स्कूलों में मान्यता, फीस संरचना और फीस निर्धारण समिति से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित नहीं की जा रही, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
जांच प्रक्रिया पर भी पक्षपात के आरोप लगे हैं। केपीएस स्कूल समूह में औपचारिक जांच पूरी होने के बावजूद सुधार नहीं दिखा, वहीं सेंट जेवियर्स स्कूल समूह की केवल एक शाखा में जांच कर मामला सीमित कर दिया गया। आचीवर्स स्कूल में अब तक जांच शुरू न होना प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है।

रंजेश सिंह ने कहा कि “जांच के नाम पर केवल दिखावा किया जा रहा है। कुछ स्कूलों को संरक्षण मिल रहा है, जो छात्रों और अभिभावकों के साथ अन्याय है।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दो दिनों के भीतर निष्पक्ष जांच और ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो एनएसयूआई 200 से अधिक लोगों के साथ जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय का घेराव करेगी।
एनएसयूआई ने मांग की है कि सभी स्कूलों की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, निजी किताबों पर रोक लगे और फीस संबंधी पूरी जानकारी अनिवार्य रूप से प्रदर्शित की जाए। संगठन ने स्पष्ट किया कि शिक्षा में अनियमितता के खिलाफ उनका आंदोलन जारी रहेगा।
नसीईआरटी और निःशुल्क निगम पुस्तकों का उपयोग सुनिश्चित करना नियमों में शामिल है। इसके अलावा, स्कूलों में मान्यता, फीस संरचना और फीस निर्धारण समिति से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित नहीं की जा रही, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
जांच प्रक्रिया पर भी पक्षपात के आरोप लगे हैं। केपीएस स्कूल समूह में औपचारिक जांच पूरी होने के बावजूद सुधार नहीं दिखा, वहीं सेंट जेवियर्स स्कूल समूह की केवल एक शाखा में जांच कर मामला सीमित कर दिया गया। आचीवर्स स्कूल में अब तक जांच शुरू न होना प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है।
रंजेश सिंह ने कहा कि “जांच के नाम पर केवल दिखावा किया जा रहा है। कुछ स्कूलों को संरक्षण मिल रहा है, जो छात्रों और अभिभावकों के साथ अन्याय है।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दो दिनों के भीतर निष्पक्ष जांच और ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो एनएसयूआई 200 से अधिक लोगों के साथ जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय का घेराव करेगी।
एनएसयूआई ने मांग की है कि सभी स्कूलों की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, निजी किताबों पर रोक लगे और फीस संबंधी पूरी जानकारी अनिवार्य रूप से प्रदर्शित की जाए। संगठन ने स्पष्ट किया कि शिक्षा में अनियमितता के खिलाफ उनका आंदोलन जारी रहेगा।
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