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दारू दुकान में दारू नही, सोसायटी में नहीं खातू…पूछ रहे चैतू- बैशाखू… ये कैसा सिस्टम…?

0 चाँटीडीह का देशी बंद, अंग्रेजी भी बन्द टाइप

0 सीपतरोड- लिंगियाडीह का खुला पट हफ्ते भर आईं सादा की खेप

बिलासपुर / अब तो पब्लिक भी कहने लगी ये कैसा सिस्टम चल रहा सरकार दारू तक नही पूरा पा रही। इससे अच्छा तो ठेकेदारी काल रहा कभी दारू और ब्रांडेड दारू का टोंटा नही रहा। आलम यह है कि ज्यादातर अंग्रेजी शराब दुकानों से पौव्वा और बियर गायब है, केवल बोतल तो कही कोरोना बियर मिल रही है। देशी के पट तो 4-5 दिन से बंद पड़े है। इसके चलते मदिरा प्रेमियों को दोहरी मार पड़ रही, उन्हें गाड़ी में पेट्रोल डलवाकर डिस्कवरी आफ दारू करना पड़ रहा/ महंगी बोतल खरीदनी पड़ रही है।
छत्तीसगढ़ सरकार का 1 अप्रैल से प्लास्टिक के बॉटलो में शराब बिकवाने का दावा फेल हो गया, हालात ये है कि सरकारी शराब दुकानों में शराब का टोंटा पड़ गया है, ज्यादातर देशी शराब दुकानें बंद पड़े है। कमोबेश अंग्रेजी शराब दुकानों में भी यही हाल है, यहां भी पौव्वा, अद्धि और बियर का टोंटा है, मदिरा प्रेमियों का बजट गड़बड़ा रहा मजबूरन उन्हें महंगा बॉटल खरीदना पड़ रहा । एकाध दुकान में बियर का थोड़ा बहुत स्टॉक है तो वो भी कोरोना बियर का,,,
दिन रात शराब दुकानों के काउंटरों में भीड़ लगी रहती थी वहां अब सन्नाटा छाया है,,,
पिछले दिनों भी इसी तरह दारू संकट था पर जब मीडिया में खबरे आई तो आनन- फानन में डेमेज कट्रोल का प्रयास करते हुए दुकानों को खुलवाना पड़ा था।

संकट प्लास्टिक कचरे का

प्लास्टिक बॉटलो में शराब सप्लाई के बाद पहले से ही प्लास्टिक कचरे को मार झेल रहे छत्तीसगढ़ के प्लास्टिक के कचरे की तादात और बढ़ जाएगी, एक अनुमान के मुताबिक इसके लिए हर साल करीब 100 करोड़ बॉटलो की जरूरत पड़ेगी जिससे प्लास्टिक बॉटलो का कचरा बढ़कर सालाना 35000 टन तक पहुंच जाएगा।

साहब फोन उठा रहे न ठेका कम्पनी के हेड

सरकारी शराब दुकानों में शराब का टोंटा क्यो है क्या वजह है सप्लाई क्यो नही हो पा रहा दिक्कत क्या ये जानने सहायक आयुक्त आबकारी नवनीत तिवारी और ठेका कम्पनी के हेड विनेक सागर से चर्चा का प्रयास किया गया परन्तु दोनो ने मोबाइल ही रिसीव नही किया।

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