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मंगलसूत्र 11, तीन माह बाद आई चर्चित किम्स की अद्भुत रिपोर्ट, 40 दिन के सीएमएचओ आवेदक को भेज रहे कोर्ट

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मगरपारा चौक के पास स्थित किम्स हॉस्पिटल

बिलासपुर। चर्चित किम्स हॉस्पिटल के मंगलसूत्र कांड की जांच के बाद तीन सदस्यीय जांच कमेटी ने 8 बिंदुओं की रिपोर्ट सीएमएचओ को सौप दी। सीएमएचओ खुद स्वीकार रहे कि ऑपरेशन से नवजात के जन्म के बाद महज दो दिन में प्रसूता को डिस्चार्ज करना गलत है। वो तब जब उसे बुखार भी है, पर खुद को कार्रवाई करने में असमर्थ बता वे शिकायतकर्ता को कोर्ट जाने की सलाह दे रहे। तो फिर सवाल यह उठ रहा कि जांच क्या गिनीज बुक में रिकार्ड दर्ज कराने कराया गया है। आखिर क्यों सीएमएचओ चर्चित निजी हॉस्पिटल के खिलाफ कार्रवाई करने से डर रहे। क्या 3 माह की जांच के बाद अपराधी आरोपी की तरह आवेदक को कोर्ट भेजना सही है। सवाल आपका है।

ये है मामला

गोड़पारा निवासी निगम के टॉस्क कर्मी कैलाश सोनी ने किम्स प्रबंधन से ईएसआईसी चलेगा यह कन्फर्म करने के बाद अपनी पत्नी रेणु को डिलीवरी के लिए हॉस्पिटल में भर्ती कराया। गत 4 सितम्बर को ऑपरेशन से बेटे का जन्म हुआ। 2 दिन बाद गत 6 सितम्बर को प्रसूता को बुखार आने के बावजूद डिस्चार्ज कर कहा कि ईएसआईसी कार्ड एक्सेप्ट नही हुआ आपको नकद भुगतान करना होगा। इसके बाद कैलाश ने आयुष्मान कार्ड भी प्रस्तुत किया पर उसे नकद जमा करने दुर्व्यवहार कर इतना दबाव बनाया गया कि कैलाश को अपने पत्नी के 3 मंगलसूत्र गिरवी रख अस्पताल में रकम जमा करना पड़ा। कैलाश ने जब कहा कि रेणु तो बुखार से तप रही तब उससे कहा गया कि आगे इलाज कराना है तो काउंटर से फिर पेमेंट कर रसीद कटाकर आइये तब आगे इलाज होगा।

पीड़ित और अपमानित कैलाश सोनी द्वारा किम्स को भुगतान की गई राशि की ऑनलाइन सबूत

तब शुरू हुई जांच

दुर्व्यव्हार से अपमानित निगम कर्मी ने पहले सीएमएचओ कार्यालय फिर कलेक्टर के समक्ष शिकायत कर जांच और कार्रवाई की मांग की। कलेक्टर के आदेश पर डॉ गायत्री बांधी के नेतृत्व में 3 सदस्यीय जांच टीम का गठन कर मामले की जांच कराई गई।
ले देकर 3 माह में जांच रिपोर्ट आई तो रिपोर्ट की प्रति देने कैलाश को 4-5 दिन तक चक्कर कटवाने के बाद बमुश्किल रिपोर्ट दी गई।

ये है रिपोर्ट

ये है टीने सदस्यीय जांच कमेटी की लटपट सामने आई रिपोर्ट

चुनावी मुद्दे की ये है हकीकत

मंगलसूत्र लोकसभा चुनाव में बड़ा मुद्दा रहा। इस मुद्दे को उठाने वाली भाजपा की देश मे वापसी भी हो गई फिर भी स्टेट गवर्नमेट के ईएसआईसी और भारत सरकार के आयुष्मान योजना के कार्ड को ठुकरा दिया गया। कैलाश ने इसके खिलाफ आवाज उठाई सीएमएचओ से लेकर कलेक्टर तक को आवेदन दिया पर हुआ कुछ नही। मिली तो सिर्फ कोर्ट जाने की नसीहत।

सीजीडीएनए ने पहले ही जताया था सन्देह


दो ढाई माह बाद भी मॉमले की जांच रिपोर्ट न आने और जांच अधिकारियों द्वारा जिस प्रकार की जानकारी दी जा रही थी सीजीडीएनए ने तब भी सन्देह जताया था कि जब जांच ऐसे डर डर कर की जा थी तो रिपोर्ट आयेगा क्या। आखिरकार हुआ भी वही डरे सहमे स्वास्थ्य विभाग ने इसे वैसे ही निबटने प्रयास किया।

ये उठ रहै सवाल

0 ऑपरेशन से बच्चे का जन्म होने के बाद भी प्रसूता और नवजात शिशु को दो दिन में छुट्टी दे दी गई। क्या ये सही है।

0 पूरी जांच हो गई पर रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख नही है कि प्रसूता को बुखार के बाद भी छुट्टी दे दे गई। क्या
ये उचित है।

0 क्या हॉस्पिटल प्रबंधन के पास ईएसआईसी से सीधे संपर्क की व्यवस्था नही है। क्या ये मरीज के परिजन की जिम्मेदारी है।

0 स्वास्थ्य महकमे के जांच टीम के अफसर पीड़ित कैलाश की शिकायत पर जांच कर रहे थे क्या किम्स प्रबंधन की शिकायत पर।

0 जब रिपोर्ट आई ही नही तो सीएमएचओ किस आधार पर आवेदक को कोर्ट जाने और चर्चित किम्स प्रबंधन को नोटिस जारी करने की बात कह रहे है।

0 3 माह में कहा गए कहूं नही काय लाय कछु नही टाइप आया रिपोर्ट

0 विधायक सुशांत की तल्ख नाराजगी के बाद भी मंगलसुत्र कांड में स्वास्थ्य विभाग का ये रवैया

क्या कह रहे जिम्मेदार-

डॉ अनिल श्रीवास्तव, सीएमएचओ, बिलासपुर

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